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संस्कार विहीन होता समाज

डॉ राजेंद्र यादव आजाद 12 Jul 2025 आलेख समाजिक आलेख 18047 0 Hindi :: हिंदी

11 जुलाई 2025 के समाचार पत्रों में एक ही तरह  के दो ऐसे समाचार प्रकाशित हुए  जो अंदर तक झकझोर  गए। हिसार के एक विद्यालय के संस्था प्रधान की उनके ही विद्यालय के दो छात्रों ने चाकू से गोदकर हत्या कर दी क्योंकि संस्था प्रधान ने उन छात्रों के बढे हुए बाल कटवा कर आने और अनुशासन में रहने की सीख दी थी । दूसरा समाचार भी हरियाणा के गुरुग्राम से था जहां एक बाप ने अपने ही बेटी को गोलियों से भून डाला ।  गुरुग्राम के दीपक यादव ने अपनी  रिवाल्वर से अपनी बेटी टेनिस की राष्ट्रीय खिलाड़ी राधिका यादव की तीन गोलियां मार कर हत्या कर दी । समाचार पत्रों के साथ  सोशल मीडिया के लिखाड लिख रहे हैं कि 25 वर्षीय राधिका यादव एक राष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी थी जो टेनिस अकेडमी चलती थी और सोशल मीडिया पर रील बनाती  थी जिसके कारण पड़ोसी ताने देते थे उनके पिता को की बेटी की कमाई खा रहा है। पड़ोसियों के तानों से नाराज होकर दीपक यादव ने गोली मारकर अपनी बेटी की हत्या कर दी  । कुछ आधुनिक नारी शक्ति जो अपने आप को स्वतंत्र विचारों का बता रही है वे दीपक यादव को न जाने क्या-क्या कह रही है लेकिन यह सच नहीं है कि एक पिता ने इसलिए अपनी बेटी को गोली मार कर हत्या कर दी कि लोग यह कह रहे थे कि वह अपनी बेटी की कमाई खा रहा है ।  दीपक यादव अगर नारी विरोधी मानसिकता का होता तो राधिका कभी भी राष्ट्रीय स्तर तक टेनिस की खिलाड़ी नहीं बन पाती ।  राधिका का पिता एक वह पिता था जो अपनी बेटी को खुले आसमान में उड़ान भरने के लिए प्रेरित करता था जिसके परिणाम स्वरुप राधिका यादव राष्ट्रीय स्तर की  टेनिस खिलाड़ी बन पाई  लेकिन राधिका ने अपने पिता की  वाजिब बातों को अनसुना कर दिया  होगा जिसके कारण दीपक यादव ने गोली मार कर उसकी हत्या कर दी।  दीपक यादव की ऐसी कोई ना कोई तो मजबूरी अवश्य रही होगी जिसके कारण उन्हें राधिका की हत्या करनी पड़ी क्योंकि कोई भी व्यक्ति साधारण अवस्था में तो एक चिट्टी को भी नहीं मारता फिर राधिका तो दीपक की बेटी थी।  मैं किसी भी प्रकार की हत्या का पक्षधर नहीं हूं लेकिन आज समाज में संस्कार समाप्त होते जा रहे हैं  स्वतंत्रता के नाम पर बच्चे उद्दंड हो रहे हैं वह अपने मां-बाप बड़े बुजुर्गों की नेक सलाह को भी नजर अंदाज करके अपनी मन मर्जी करते हैं । लाख समझाने के बाद भी वे वहीं   करते हैं जो उन्हें पसंद है चाहे उनके इस कृत्य से उनके मां-बाप की बदनामी ही क्यों ना हो रही हो।  बच्चे आजादी चाहते हैं वे चाहते हैं कि उन्हें कोई रोके टोके नहीं।  रोकने टोकने के कारण  ही तो हिसार के संस्था प्रधान की उद्दंड छात्रों ने हत्या कर दी।  अगर राधिका की कुछ आदतें उसके पिताजी को पसंद नहीं  थी तो राधिका को वे  आदतें छोड़ देनी चाहिए थी।  दीपक यादव ने अपनी बेटी को समझाया भी होगा लेकिन वह उनकी बातें नहीं मानी होगी तब आवेश में आकर दीपक यादव ने अपनी बेटी की हत्या कर दी जो सरासर गलत है। शायद दो वर्ष पूर्व इसी गुरुग्राम में भारतीय सेवा के एक पूर्व सैनिक राज सिंह यादव ने भी आवेश में आकर पांच व्यक्तियों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी जिससे दो घर बर्बाद हो गए और राज सिंह ने जेल में ही आत्महत्या करनी पड़ी।  किसी भी प्रकार की हत्या जायज नहीं है लेकिन हत्यारे को आरोपित करने से पहले उन पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए जिसके कारण वह व्यक्ति हत्या जैसा जघन्य अपराध करने के लिए विवश हुआ।  अगर हम और आप एक तरफ देखते हुए हत्यारो को ही दोषी ठहराते रहेंगे तो न जाने ऐसी कितनी ही और हत्याएं होती रहेगी।  समाजशास्त्र के  जानकर बृजकिशोर शर्मा का मानना है की हत्या क्यों हुई उन पहलुओं पर भी अध्ययन करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो पाए।  क्या एक शिक्षक द्वारा अपने छात्रों को  टोंकने मात्र से उसकी हत्या कर दिया जाना जायज नहीं  है  उन  छात्रों को दंड दिया जाना चाहिए और दीपक यादव को भी  कडी से कडी सजा मिलनी चाहिए लेकिन सोशल मीडिया पर रिले बनाने वाली बेटियों और बहनों को भी सोचना होगा कि कहीं उनके इस आचरण से उनके मां-बाप की आत्मा को पीड़ा तो नहीं पहुंच रही है।  उन्हें समझना होगा अपने बड़े बुजुर्ग , मां-बाप की बातों को की वे जो रोकते टोकते हैं तो वह उनके हित में ही है  लेकिन सोशल मीडिया और  स्वतंत्रता वादी नारियों ने  सामाजिक संस्कारों को नष्ट कर दिया है जिसके कारण एक पिता अपनी बेटी की हत्या कर देता है तो दूसरी तरफ विद्यार्थी अपने गुरु को ही चाकू मार देते हैं।  समाज का युवा आज संस्कार विहीन होता जा रहा है।  सोशल मीडिया का प्रभाव युवा वर्ग पर सकारात्मक कम और नकारात्मक ज्यादा पड़ रहा है।  सोशल मीडिया के अधिक उपयोग से तनाव ग्रस्त और चिंतित हो रहा युवा वर्ग। सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने के कारण वास्तविक जीवन के रिश्तो से दूरियां बन रही है । सोशल मीडिया की अश्लील रिले देखने से मानसिक  विकृति पैदा हो रही है युवाओं के मन में ।  कान में ईयर फोन लगाकर रिले देखने वाला युवा वर्ग दादा-दादी मां-बाप भाई बहन से दूर होकर उद्दंड अपराधी प्रवृत्ति का बन रहा है। एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए हमें अपने बच्चों को संस्कारवान बनाना ही होगा अन्यथा आने वाली पीढ़ियां अपराध के दलदल में फंसकर नष्ट हो जाएगी। डॉ राजेंद्र यादव आजाद दौसा राजस्थान मोबाइल 941427 1288

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