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“समता के सूर्य: बाबा साहब अंबेडकर”

Ajay kumar suraj 14 Apr 2025 आलेख समाजिक #“समता_के_सूर्य:_बाबा_साहब_अंबेडकर” #baba_sahab_ambedkar #bharat_ratn_baba_sahab #बाबा_साहब 29629 0 Hindi :: हिंदी

“समता के सूर्य: बाबा साहब अंबेडकर”

14 अप्रैल — यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उस युगपुरुष की जयंती है, जिसने लाखों शोषितों, वंचितों और उपेक्षितों को एक नई पहचान दी। यह दिन है भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती का — उस महापुरुष का स्मरण, जिसने अपने विचारों, संघर्षों और बलिदान से इतिहास की दिशा बदल दी।

बाबा साहब का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उनके भीतर कभी कोई कड़वाहट नहीं आई। उन्होंने अपमान को कभी बदले की भावना से नहीं देखा, बल्कि उसे ज्ञान और सेवा के माध्यम से जवाब दिया। वह कहते थे — “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।” यह सिर्फ नारा नहीं, एक सम्पूर्ण जीवन दर्शन है, जिसने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को आत्मविश्वास से भर दिया।

संविधान निर्माता के रूप में उन्होंने जो नींव रखी, वह आज भी भारत की लोकतांत्रिक आत्मा को जीवित रखे हुए है। उन्होंने हर उस व्यक्ति के लिए आवाज़ उठाई, जो सदियों से गूंगा बना दिया गया था। बाबा साहब का सपना एक ऐसा भारत था, जहां किसी को उसके जन्म से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से पहचाना जाए।

आज जब हम उनकी जयंती मना रहे हैं, तो यह सिर्फ श्रद्धांजलि का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दिन भी है। क्या हम वाकई उस भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जिसका सपना बाबा साहब ने देखा था? क्या हर बच्चा शिक्षा पा रहा है? क्या हर नागरिक को बराबरी का अधिकार मिल रहा है?

बाबा साहब की जयंती हमें यही याद दिलाती है — कि यह संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ। हमें उनके विचारों को सिर्फ किताबों में नहीं, अपने आचरण में उतारना होगा।

उनका जीवन एक दीपक की तरह है, जो अंधेरे में भी राह दिखाता है। आइए, इस दीपक को बुझने न दें। आइए, समता, बंधुता और न्याय के उस पथ पर चलें, जिसे बाबा साहब ने अपने लहू से सींचा।

"जय भीम!"

अजय कुमार 'सूरज'

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