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सचाई

Pinky Kumari 22 Jan 2025 आलेख अन्य 35444 0 Hindi :: हिंदी

जब कोई इंसान जीवन कि असल सचाई जान लेता या में कहूँ पूर्ण रूप से अपने आपको जान लेता है। और सचाई के मार्ग पर चलता है तो कुछ लोगों को यह बात हजम नहीं होती है। कि हमसे आगे यह क्यों निकल गया हम बेव कुफ है तो यह बेवकुफ क्यों नहीं है। हम इंसान अक्सर सबकों एक रास्ते पर चेलता देखना चाहते है। ( मैं कहुँ तो एक भेड़ चाल ) कि तरह देखना चाहते है। अगर उस लाईन में से कोई निकल भी गया तो हमे चिड़ होती है। की यह क्या हो गया उसको खिचते बार - बार प्रयास करते है। उसे उस लाइन में लाने के लिए और जब वह व्यक्ति नहीं आता है। तो हम उस पर आरोप प्रत्यरोप लगाते है। जैसे कि वह तो नशा करता है। या वह पागल है। उसे अपनी पब्लिशिटी के लिए कर रहाँ यहा तक कि कुछ लोग तो उसे पथर भी मारते है। पर वह मस्त अपनी धुन में चलता है। और पुरा जीवन ईश्वर को सम्प्रित कर देता है। अब यहाँ ईश्वर को सम्प्रित करने का मतलब यह नहीं है। कि उसने कोई विषश पोशाक पहनी है। हाथ कुछ कमडल लेलिया हो या गले में कोई विषश तरह कि माला पहनी हो और पिछे तीन चार शिषय मौजुद है। और घण्टो बैठकर भगवान के आगे बस पुजा करता हो यह सब एक पाखण्ड है। ऐसा करके हम सचाई से और अपने आपसे दुर जाते है। 
आसान नहीं है। खुद को समझना आसान नहीं है। सच को जानना आसान नहीं है। कि पूर्ण रूप से अपने आपको भगवान को समर्पित कर देना जब मन कि चैतना जागी तब पता चला कि सच क्या है। और झुठ क्या है। गुस्सा आता है। जब कोई अपने आपको कोई भगवान कहदे हजम नहीं होती यह बात क्योंकि हम भगवान के नाम पर आडम्बर और पाखण्ड करते है। और वह लोग भगवान के नाम कि सच्चाई तक जाते पता करते है। कि आखिर सच क्या है। सचल क्या रहा है। और वो इन सब से उपर उठकर देखता है। तो पता चलता है। कि हम इंसान एक मीठी कि कटपुतली है। कोई है। हमसे उपर जो हमें नचाएँ जा रहाँ है। और हम नाचे जा रहें है। उस पूर्ण रूप से जो सच्चाई को प्राप्तत करले वहीं ईश्वर है। और ईश्वर को जानना  सभी कर्म काण्डों से नियमों से पाखण्डों से ऊपर कि बात है। 
यह नियम हम इंसानों ने बनाएँ है। और समय आने पर यह नियम बदलते रहते है। क्योंकि यह नियम हमने खुद अपने स्वार्थ के लिए बनाएँ जो बदल जाएँ तो नियम ही क्या वो तो सिर्फ एक झुठ है जिसके चारों और हम घिरे हुए है। 
भगवान के नियम तो मृत्यू है। जन्म है। सूर्य है चन्द्रमा है। आग है जल है। हवा है। धरती है। आदि और इन नियमों पर किस की भी नहीं चलती और तब हम इंसानों कि इस पर नहीं चलती है। तो हम अपने ही नियम बना कर खुद भी चलते है। और दूसरे लोगों को भी चलाते है। और कोई हमारे द्वारा बनाएं नियमों पर सवाल जवाब और विरोध करता है तो हमें गुस्सा आता है। हम उसे पागल घोषित कर देते है। 
आप सोचते होंगे कि में अपने लेख में बार - बार सिखने कि खुद को जानने कि सच्चाई को समझने कि क्यों बात करती हूँ क्योंकि मेंने समझा है। मेंने जाना है कि सच क्या है। और झुठ क्या है। में यह तो नहीं कह सकती कि मेने पूर्ण रूप से जान लिया है। पर जितना भी जाना है। वो मेरे जीवन में एक औशधी कि तरह काम किया है। 
जब हमें भगवान से सिखने कि बात आती है। तो हम उसे एक पत्थर का रूप देदेते है। या फोटों बना कर पूजने लगते है। क्योंकि हमसे सिखा नहीं जाता तो हम एक आसान रास्ता चुनते जिस पर हमें चलते हुए जोर ना आए और भगवान का दिल तो देखों हम पर कृपा कर ही देते है। क्योंकि हमारी बोद्धिक शमता इतनी नहीं है। कि हम उनको जाने 
अगर अर्जुन युद्ध भुमि में भगवान कि कोई फॉटों या मूर्त लेकर बैठ जाता और नाम जपता कि है कृष्ण रक्शा करों तो युद्ध नही लड़ा जाता उसने श्री कृष्ण ने जीवन का पुरा सार खोल कर अर्जुन के सामने रख दिया सत्य क्या है। और असत्य क्या है। इसका ज्ञान दिया कर्म योग क्या ज्ञान दिया कि तुम्हारा इस समय कर्म क्या है। धर्म योग को समझाया कि तुम्हारा इस समय धर्म क्या है। ध्यान योग को समझाया कि तुम्हारा ध्यान सिर्फ युद्ध पर होना चाहिए पूर्ण समर्पण करोदों जो तुम्हारे द्वारा किये जाने वाले कर्म को कर्म करो अर्जुन यही सष्टी का नियम है। 
और यह नियम सिर्फ अर्जुन पर ही नहीं लागु होते यह नियम हम पर भी एक समान लागू होते है सत्य को जानने कि जरूरत है। और जब कोई इस सत्य को जान जाता है। तो वह जीवन रूपी नाव को बड़ी आसानी से पार कर जाता है। और फिर में उसे अपने अन्दर समाहित कर लेता हूँ फिर मुझमें और उसमें कोई फर्क नहीं रह जाता उसके जीवन के सारे दुःख और सुख मेरे हो जाते है। फिर में रक्शा करता हूँ उसकी यही कृष्ण है। 
इंसान कि जितनी बोद्धिक श्मता होती है वह उसी के अनुरूप कार्य कर पाता है। जरूरी नहीं कि सभी ज्ञानी हों जरूरी नहीं कि सभी सत्य को जान पायें जरूरी नहीं कि ईश्वर को पूर्ण रूप से जान पायें और हम किसी को बता भी नहीं सकते कि सत्य क्या है। क्योंकि हर इंसान अपने आपको  पूर्ण ज्ञानी समझता है। इसी लिए कहती हूँ कि किसी को कुछ समझाने कि जरूरत नहीं है। बस अपने आपको जानों अपने पर जितना हो सके पूर्ण कार्य करों और यह नहीं भी होता है। तो जो चल रहाँ है। संसार में उसका आन्दलो बस उसमें फसों मत किसी को कुछ बताने कि जरूत नहीं है। और जो चल रहाँ उसका पूर्ण रूप से आन्दलो हमें किसी साथ भी नहीं देना है। तो किसी का साथ छोड़ना भी नहीं है। सभी अपनी जगह सही है। बस अपने आपको जानों इस दुनिया को समझों यही सत्य है। 
धन्यवाद 🙏🙏✍️✍️

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