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पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी

Pinky Kumari 28 Dec 2024 आलेख दुःखद 22173 0 Hindi :: हिंदी

हमारे देश के महान अर्थशास्त्री और हमारे पूर्व प्रधानमंत्री आज हमारे बीच नहीं रहें उनकी शालिन्ता उनका मौन रहना हमारे लिए एक प्रेरणा बन कर सामने आयी है। उनका यू कम बोलना और मौन रहना उनकी कमजोरी नहीं बल्की उनकी और हमारे देश कि एक नई ताकत बन कर सामने आई है। कहाँ जाता है। कि जितना बोलगे आप उतना आप अपनी मूर्खता को साबित करते है। और जितना कम बोलेगे आप उतना ही अपने जीवन को एक नई दिशा दे सकते है। और आज नहीं तो कल दुनिया आपको झूकर प्रणाम करेगी में यह नहीं कहे रही हूँ कि चुप रह कर कम बोलकर आप किसी को अपनी नजरों में झुकाएं किसी को झुकाया नहीं जाता बल्की लोग खुद में खुद झुक जाते है। अक्सर हिरे कि किमत उसके खों जाने पर पता चलती है। और आज उसी हिरे कों हम खों चुके है। यह हमारे लिए बड़ी दुःख की बात है। हम उनकी  शाक्तिन्ता से क्या सिख सकते है। और क्या नहीं यह हमारी सोच पर नर्भर करता है। 
= ) में यह नहीं कह रही हूँ कि बिल्कुल ही ना बोले जरूर बोले पर सोच समझकर बोले वहाँ बोले जा हमारी जरूरत हो और ऐसा बोले लोग याद रखे हम दूसरो से तभी सिख सकते है। जब हमारा मन और दिमाक अन्दर से एक दम शान्त होगा मौन रहना कोई कमजोरी को साबीत नहीं करता बल्की यह हमारी ताकत है। जैसे की हमारे पूर्व प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह उनकी यह एकाग्रता उनके विषय में ही नहीं बल्की देश की तरकी  में एक सफल योगदान साबीत हुई है। एक तरफ हमारे देश पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी थें। एक सवाल उठता है। कि आज का युवा वर्ग बल्कि हम क्या सिख सकते है। उनसे 

युवा => अपने आपसे सवाल करों क्या हमें सही शिक्षा मिल रहीं है। और मिल भी रहीं है। तो भी यह सवाल करों कि हमारे द्वारा ली जा रही शिक्षा हमें किस दिशा में लेकर जा रही है। जरूरी नहीं कि सभी प्रधानमंत्री बने पर एक ऐसा व्यक्ति बने जो देश के विकास में अपनी एक अहम भूमिका रखे चाहे वो आर्थिक हो या सामाजिक आज का युवा जिस तरह धर्म के नाम पर अपनी और देश के लोगों कि जान का दुश्मन बन बेठा है। एक शिक्षा ऐसा हथियार है। जो आपको सही दिशा दे सकता है। जब आप सही शिक्षा लेते है। तो आप देख पाते है। कि समाज में फैल रहें अधविश्वास, और हमारे उपर थोपी गई ऐसी मान्यताये जो हमें निचे कि और खिचते जा रही है। तो सही शिक्षा लेने के बाद आप देखेंगे कि आप से जड़ी अन्धद प्रथाये अन्धविश्वास को आप विरोध करेंगे कि यह गलत है। यह नहीं होना चाहिये था। या नहीं होना चाहिये जब आप इन सबसे ऊपर उठ कर देख पाते है। कि देश नाम कि भी कोई जगह जा हम या में रहता हूँ मेरे देश के प्रति इस समाज के प्रती क्या कत्वय होने चाहिए और क्या कतव्य है। तो तभी हम देश में फैल रही असमाजिकता, असमानता, गरीबी , बेरोजगारी ,धर्म के प्रति असमानता ,आदि समस्याओं पर ध्यान जाता है। पर यह तभी मुकिन है। जब आप अपने आपसे हर समय सवाल करेंगे में मानती हूँ कि हर कोई प्रधानमंत्री नहीं बन सकता हर कोई इतिहास नहीं रच सकता पर अगर आप यह देख सकते है। कि क्या गलत है। और क्या सहीं विरोध भी नहीं कर सकते तो मुझे इतना पता है। कि आप गलत साथ नहीं दोगे इतना तो मुझे पता है। आपका गलत के प्रति साथ नहीं देना भी एक अहम योगदान साबित करता है। कहने कि बात इतनीसी ही है। कि खुद पर काम करो खुद को जाने इस समाज को जाने सहि गलत को समझे बस इतना ही काफी है। विरोध करना ना करना यह बाद कि बात है।
अगर हम किसी का कुछ अच्छा भी नहीं कर पारहे है। तो  किसी का बुरा करना भी हमारा कोई हक नहीं है। जब खुद के ऊपर काम करेंगे खुद को समझोंगे खुद को जानेंगे और अपने आप से हर समय सवाल करें कि इसे और भी अच्छा हो सकता है। क्या 
यही कुछ आदते महान लोगों में होती है। यह हमसे अलग नहीं है। भगवान ने बद्धि सभी को एक समान दि है। बस अन्तर इतना है। कि हम अपनी बद्धि को कहाँ और कब इस्तेमाल करे और कितना इस्तेमाल करते है। शांत रहें मौन रहे और देखे कि में क्या अच्छा कर सकता हूँ अपने लिए , अपने परिवार के लिए , और अपने देश के लिए 
में युवाओं से यही अपिल करती हूँ कि धर्म , और जाति के पिछे भागने कि बताएं विज्ञान के पिछे भागे , अन्धविश्वास के पिछे भागने के बजाए सचाई के पिछे भागे , और किसी और के पिछे भागने कि बजाएं अपने आप को जानने के लिए भागे अपनी जिम्मेदारियों को समझे और आगे बढे  अपने जीवन को सादगी बनाए रखे 
कोटि - कोटि नमन ऐसी महान विभूति को जितना हो सके ऐसी महान विभूतियों से कुछ सिके जो अपने जीवन को एक इतिहास बना कर चले गयें है में बार - बार यही कहती हूँ कि अपने जीवन में अच्छा सिखते रहे और अपने आप से सवाल करते रहें क्या में यह सही कर रहा हूँ सही गलत कि हमें  पहचान होनी चाहिए । अब चिन्ता कि बात यह है कि आज के समय में हमें हर संसाधन हमारे पास हमें उपलब्ध है। जितनी सुविधा मिली है। उतनी ही हमारी सोचने कि शमता उतनी ही कम होती जा रहीं है। जिवन में हर वस्तु कि किमत चुकानी पड़ती है। तो सोचों हमारा जीवन तो पग - पग पर किमत माँगता है। जीवन तो स्वयम किमती है। और इसका हिसाब तो हमें रखना होगा । मूल्य उसी का ही दिया जाता है। जिसका हिसाब बरा - बर हो और शांत होकर अपने आपर काम करते है। अपने आपको समय दे और गलत होने वाले पर आवाज उठाएँ 

धन्यवाद अगर मेरा लेख आपको पसंद आया हो तो अगर कोई त्रुटि हो  तो क्षमा करे मेरी कोशिश रहती है। कि में अच्छा लिखु अगर फिर भी कोई बात आप सभी बुरी लगी हो तो क्षमा करें दिल से
धन्यवाद 🙏🙏✍️✍️

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