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निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी को श्रद्धांजलि

Ajay kumar suraj 18 May 2025 आलेख धार्मिक #निरंकारी_बाबा_हरदेव_सिंह जी को #श्रद्धांजलि 42208 0 Hindi :: हिंदी

निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी को श्रद्धांजलि

(लेख उनके शिक्षाओं, कार्य और सामाजिक योगदान पर)

जब भी मानवता, सेवा और प्रेम की बात होती है, वहाँ निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी का नाम श्रद्धा से लिया जाता है। एक संत, एक विचारक और एक महान सामाजिक सुधारक के रूप में बाबा हरदेव सिंह जी ने अपने जीवन को मानवता की सेवा में अर्पित कर दिया। उनका जीवन संदेशों, शिक्षाओं और कार्यों की एक प्रेरणादायी गाथा है, जो आज भी करोड़ों लोगों के जीवन में प्रकाश बनकर मार्गदर्शन कर रही है।

शिक्षाएँ: एकता, प्रेम और निरंकार का संदेश
बाबा हरदेव सिंह जी की सबसे प्रमुख शिक्षा थी – "मनुष्य को मनुष्य से प्रेम करना चाहिए, क्योंकि जो निरंकार को जानता है, वह भेदभाव नहीं करता।" उन्होंने हमेशा यही कहा कि जब तक मानव जाति में प्रेम, करुणा और भाईचारा नहीं होगा, तब तक सच्ची आध्यात्मिकता नहीं आ सकती।

उनका संदेश था कि भगवान को केवल मंदिरों, मस्जिदों या गुरुद्वारों में नहीं, बल्कि हर प्राणी में देखा जाए। वे धार्मिक रूढ़ियों से परे एक व्यापक और सर्वसमावेशी अध्यात्म का प्रचार करते थे, जिसमें जात-पात, ऊँच-नीच, भाषा और क्षेत्र का कोई स्थान नहीं था।

कार्य: निरंकारी मिशन को जन-जन तक पहुँचाना
1980 में अपने पिता और निरंकारी मिशन के तत्कालीन प्रमुख बाबा गुरबचन सिंह जी की दुखद मृत्यु के बाद, बाबा हरदेव सिंह जी ने मिशन की बागडोर संभाली। उन्होंने इस मिशन को केवल भारत ही नहीं, विश्व के कोने-कोने तक पहुँचाया।

उनकी अगुवाई में निरंकारी मिशन ने शांति, मानवता और आध्यात्मिक जागरूकता के लिए हजारों सत्संग, आध्यात्मिक शिविर और जनसेवा कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने यह दिखाया कि धर्म केवल पूजा का नाम नहीं, बल्कि कर्म और प्रेम का मार्ग है।

सामाजिक योगदान: सेवा ही धर्म है
बाबा हरदेव सिंह जी ने "धर्म को केवल मंदिर में सीमित मत रखो, उसे जीवन में उतारो" का जो संदेश दिया, उसे उन्होंने सेवा के माध्यम से साकार किया। उनके नेतृत्व में निरंकारी सेवादल ने रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, आपदा राहत कार्य, वृक्षारोपण और गरीबों की मदद जैसे अनगिनत सामाजिक कार्य किए।

उनका विश्वास था कि मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे न केवल अच्छे भक्त बनें, बल्कि अच्छे नागरिक और अच्छे इंसान भी बनें।

एक प्रेरणा जो आज भी जीवित है
बाबा हरदेव सिंह जी अब हमारे बीच भौतिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनका विचार, उनका प्रेम और उनका संदेश आज भी जीवित है। उन्होंने हमें जो मूल्य सिखाए – सहिष्णुता, भाईचारा, निस्वार्थ सेवा और अध्यात्म – वे आज के समाज में और भी अधिक प्रासंगिक हैं।

उनकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ आज भी कानों में गूंजती हैं –

"धर्म से जोड़ो, धर्म के नाम पर तोड़ो मत।"    "प्यार सजाता है गुलशन को, आयर नफ़रत वीरान करे"

अंतिम शब्द
बाबा हरदेव सिंह जी को हमारी श्रद्धांजलि केवल पुष्पों से नहीं, बल्कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही सच्ची हो सकती है। वे एक युगद्रष्टा थे, जिनकी दृष्टि में हर मानव एक समान था और हर धर्म एक ही सत्य की ओर जाने वाला मार्ग।

उनकी स्मृति को शत-शत नमन।  
"बाबा हरदेव सिंह जी – आप थे नहीं, हैं और रहेंगे – हर दिल में, हर सेवा में, हर सच्चे कर्म में।" 🌹

                                                                                        धन निरंकार जी 
            अजय कुमार 'सूरज'

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