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मन पर मत चलिए मन क्या

Pinky Kumari 07 Jan 2025 आलेख समाजिक मन 17960 0 Hindi :: हिंदी

मन पर मत चलिए मन क्या - क्या करवा देता हम इंसानों से जिसकी उमिद्द नहीं होती वो सब करवा देता है। हमारी । मन कि इच्छा समय के साथ और उम्र के साथ बदलती रहती है। जैसे कि 
बचपन में खिलोनों कि मांग करता है। नई चिजे खाने कि मांग करता रहता है। 
किशोंर अवस्था में प्यार के नगमें गाने कि माँग करना है।
युवाअवस्था में कुछ सफलता कि सिढ़ी चढ़ने को मन करता है। 
और वृद्ध अवस्था में सारे जिन्दगी भर किये हुए कर्म का हिस्ब रखता है। और राम नाम जप करने को मन करता है। 
यह है। हमारी मन कि इस्थिती जो उम्र के साथ बदलती रहती है। और समय के  साथ दिखा भी देती है। अब बात इसपर है। कि एक तरफ मन सफलता कि तरफ भागता है। और एक तरफ जाहा नहीं भागना चाहिए वहाँ भागता है। में मानती हूँ कि उम्र के साथ गलतिया होती सब करते है। पर जो अपनी गलतियों से सिख ले और वही गलतिया  ना दोहरायें जो उसने कुछ समय कि थी वही जिवन को एक नई दिशा दे सकता है। 
मुझे आज कि जैंनजी युवा पिढ़ी को देखती हूँ तो अफसोस होता है। कि अपने जीवन को वो स्वयम ही खत्म करने में लगे है। मुझे नहीं पता कि में कहाँ तक सही हूँ पर आज के जैंनजी बच्चें मन के स्थर पर काम करते है। जो उनका मन कहता है। वही  करते है। अब चाहें  वो अच्छा हो या बुरा अच्छा हो तो बहुत ही  अच्छा काम है। पर गलत है। तो वो सहीं नहीं है। 
जो लोग मन के स्थर पर रह कर काम करते है। और मन को ही बुद्धि समझ लेते है। वहाँ दिकते और बढ़ जाती है। में यह नहीं कह रही हूँ कि मन गलत है। पर मन के साथ बद्धि का भी इस्तेमाल किया जायें तो और भी अच्छा है। 
जैसे कि आज के युवा बच्चों को प्यार इस तरह होता है। जैसे कि हम कपड़े बदलते है। जो रिस्ते मन के आधार पर किये जाते है। अक्सर वह रिस्ते ज्यादा दिन तक नहीं चल पाते जैसा कि हमें हर दिन देखनें  को मिलता है। 
जिस आकर्षण को तुम प्यार कहते हों वो आकर्षण कुछ चंद दिनों का होता है। अगर में कहु कि कोई समझदार व्यक्ति है। तो उसके लिए आकर्षण चंद मिनटो का होता है। क्योंकि ऐसा वो जान चुका है। कि यह मन कि लहरें है। जो उठती है। और फिर शांत हो जाती है। और इस बिच काम करता है। हमारा मन। हमारा मन कहता है कि बस यही दुनिया है। और हमारी बुद्धि कहती है। कि नहीं यह गलत है। बस बुद्धि कि यही आवाज को हम सुन नहीं पाते क्योंकि हमारा मन या में कहुँ कि हम मन के आधार पर चल पड़े है।जो कि कहीं ना कहीं गलत साबित होता है। 
में यह नहीं कहती कि हर जगह मन गलत होता है। अगर मन गलत होता तो ऐपीजे अब्दुल कलाम , रतन टाटा जी , मनमोहन सिंह जी , कल्पना चावला , इंदिरा गांधी , जैसे तम्माम उदाहरण हम देख सकते है। जिन्होंने मन कों बुद्धि के साथ काम में लिया और अपने जीवन को लोगों के लिए एक ईतिहास बना कर चलें गयें 
आप पर निर्भर करता है। कि हम अपने मन को कैसी दिशा दे हर जगह मन काम नहीं करता कहीं ना कहीं हम मन को चकमा देकर गलत रास्ते चुन लेते है में हर बार यही कहती हूँ कि अपने पर काम करें अपने को जानें कि क्या गलत है और क्या सहीं 
आज यहीं कारण है। कि दूसरा कोई बच्चा अब्दुल कलाम नहीं बन पा रहा है। क्योंकि यह सत्य का मार्ग है। और आज के समय में सत्य चलना तो दूर सत्य बोल ही नहीं पा रहे है। क्या अलग है। हमारे में और उनमें बस इतना ही अन्तर है। कि वह  मन को वश में करके और मन को अपनी बुद्धि के साथ काम में लिया और आज के युवा जैंनजी सिर्फ और सिर्फ मन को ही बुद्धि मान बैठे है। इसी कारण वह अपने जीवन का आप खों बैठे है। या में कहूँ कि अपना आपा खो बैठे है। 
क्या नही मिलता आज के समय में वो सारी सुविधा मिल जाती है। जिसकी हमें उमीद नहीं होती फिर भी हम अपने आप को पहचान नहीं पा रहें है। ऐसा क्यों कभी पूछा है। अपने आप से या में कहूँ कि  अपने मन से हमें जितनी सुविधा मिली है। हम उतना ही अपने आपको असहाय महसूस करते है। क्योंकि हम अपने जीवन को बुद्धि के हिस्साब से ना चलाकर मन के आधार पर जीवन को जी  रहें है।  मन को जितना काबु में रखेंगे उतना ही हमारे लिए सही होगा जरूरी नहीं धरती पर मिलने वाली हर वस्तु , हर जगह हमारी हो कहीं ना कहीं वो हमारे लिए एक शोंपिस है। जिसे हमें देख कर छोड़ देना चाहिए चिड़िया घर में मिलने वाले जानवर भी हमारे सड़क पर रहने वाले जानवरों से मेल नहीं खाते या में कहूँ कि नहीं मिलते है। अब समझने कि बात है। कि हम क्या चिड़िया घर से शेर को उठाकर ले आते है। नहीं ना क्योंकि अगर हम उसको बहार लाते है। तो सबसे पहले वो आपको उनकसान पहुंचायेगा इसी लिए कुछ जानवर चिड़िया घर में ही अच्छें लगते है। और कुछ जानवर जैसे कि कुते , बिल्ली बहार ही अच्छे लगते है। जो हमारे पास है। उस चिज का या उस वस्तु का आन्द लिजिए धरती पर मिलने वाली कुछ वस्तुएं शोपिस ही अच्छी लगती है। या में कहुँ कि देखने से ही अच्छी लगती है। अगर उसे खरीद लिया जाएं तो हमारे जीवन के लिए घातक साबित होती है। जैसे कि चिड़िया घर का शेर और सड़क पर मिलने वाली बिल्ली में बहुत अन्तर होता है। क्योंकि शेर को अगर बहार छोड़ दिया जायें तो वो हमारे लिए और लोगों के लिए जान का दुश्मन साबित होगा और ना बिल्ली
धन्यवाद शायद यह लेख आपको बहुत पसंद आया होगा जिवन को मन के आधार पर ना जिकर बुद्धि को मन के साथ जोड़ लिया जायें तो जीवन में आने वाली हर मुसीबतों से बचें रहेंगे 🙏🙏✍️✍️✍️✍️

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