Shubham Kumar 30 Mar 2023 आलेख दुःखद काश वो दिन फिर चले जाते 91644 0 Hindi :: हिंदी
मेरे बेस्ट फ्रेंड, बबलू तुम कैसे हो मैं तुम्हारा प्रिय मित्र. __ शुभम कुमार,,, आज मैं लिखने बैठा हूं, सुबह ही मुझे, इस बात का एहसास हुआ, कि मैं तुझे बहुत ही, मिस कर रहा हूं, किसी ने मेरे दिल को, बहुत ही घात किया है, हर किसी के जिंदगी में, एक ही बेस्ट फ्रेंड होता है, काश ऐसा होता, कि कोई और तुम जैसा मिल जाता, जो मेरी भावनाओं को समझता, जो मुझे समझता, यह दुनिया बिल्कुल ही अलग है मेरे दोस्त, कोई किसी की भावनाओं को, ठीक से समझता ही नहीं, काश भावनाओं को, समझने के लिए इस दुनिया में, कोई भाषा होता, तो कितना अच्छा होता, तो हर आदमी गलत नहीं होता, मैं अपने लिए प्रशंसा सुनने को, मेरे कान तरस गए, लेकिन निंदा तो हर जगह ही मिलती है, तुम नहीं जानते मेरे मित्र,, आजकल लोग लोगों की भावनाओं से खेलते हैं, दोस्त नाम की, कदर ही नहीं इस जहां में, काश हर किसी को तुम जैसा कदर करने वाला होता, वह नदी के किनारे बैठ कर, ढेर सारी बातें करना, मैं तुम्हारी बातें सुनकर, कभी भी जी नहीं भरता था, हर मेरी बातें सुनकर, तुम्हारा भी दिल नहीं भरता था, सारा दिन यूं ही बातें करने में कट जाते थे, याद है जब तुझे भूख लगती थी, तो मैं अपना मुंह का निवाला, तुम्हारे मुंह में, जबरदस्ती खिलाता था, और तुम मुझे खिलाते थे, हां आज इस दुनिया में, खिलाने वाले नहीं, खाने वाले ज्यादा भरे पड़े हैं, अगर उन्हें कुछ नहीं खिलाया जाए, तो दोस्ती कट जाती है, तुम्हें याद है, तुम इस बात को कैसे भूल सकते हो, मैं तुम्हारे साथ मेला जाता था, मेरे पास पैसे नहीं होते थे, तुम्हारे पास भी नहीं होते थे, किसी प्रकार से, ₹1 होता, तो उसकी चॉकलेट लेकर, खा लेता था, तुम्हारी बातें सुनकर, मैं घर से बाहर निकलना, जरूरी समझता था, याद है जब तुम मुझे, ढेर दिन के बाद, किसी मार्केट में मिले थे, तो उस समय तुम ने मुझे, आवाज दी थी, और मैं वहां पर खड़ा हो गया था, अब तुम आकर मेरे सीने से, लिपट गए थे, एक दूसरे की आंखों में पानी उतर आए थे, कितने ही लोग हम दोनों को, फटी फटी नजरों से देख रहे थे,, हां मेरे दोस्त, इस जहां में ऐसे भी दोस्त हैं, जो बाद में, दिखाई पड़ने पर, चुपके से पतली गली_ गीदड़ की तरह भाग चलते हैं, पहले बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं, लेकिन जब उनके पास जाओ, तब हम मुंह से बात भी नहीं करते, मुझे गर्व है कि मैंने पहली बार_ तुम्हारे घर को गया था, और तुमने मुझे हाथ पकड़ कर, अपने घर ले जाकर, अपने ही पास बैठा कर, ढेर सारी बातें की थी_ और हम दोनों खाना साथ साथ, ही खाए थे, तुम मुझे छोड़ने के लिए, अपने घर से, बहुत दूर मार्केट तक, मेरे साथ पैदल पैदल, चले आए थे, ऐसा लगता था कि हम दोनों, सदियों से बिछड़े पड़े हैं, एक दूसरे की बातें सुनकर, दिल ही नहीं भरता था, एक दूसरे के पीछे चल कर, भी हम थक नहीं रहे थे, आजकल तो लोग ऐसे हैं, ऐसा कहते हैं कि तुम चले जाओ, सॉरी मुझे कोई काम है, मुझे जाना पड़ेगा, ऐसा कह कर निकल लेते हैं, और फिर से तुमने विदाई देते वक्त, मुझे अपने कलेजे से लगाया था, इस बात से मेरे दिल को, कितनी तसल्ली मिली थी, कोई तो है जो मुझको इतना प्यार करता है, अगर तेरे जैसा यार हो, तो बात ही क्या कहने, तुम मेरे दुख में दुखी होते थे, एक बार जब जब तुम्हारा, तबीयत अचानक खराब था, तुम नहीं जानते मैं, कितना घबरा चुका था, रात को अकेले ही, डॉक्टर को बुलाने, चला गया था, जैसे चोट तुझको लग रही हो, और दर्द मुझे हो रहा था, हां तुमने मेरी बातों को, कभी भी चापलूसी नहीं की, मेरी बातों को अपने दिल में छुपाया है, और हमेशा मेरी कामयाबी के लिए, सच्चे हृदय से, ईश्वर से कामना की है, भले ही तुम्हारे पास पैसे ना हो, लेकिन तुम्हारी मित्रता, अनमोल है जिसका कोई मोल नहीं, अगर सब तुम्हारे जैसा होता, तो कितना अच्छा होता, आजकल तो लोग दोस्ती तो करते हैं, मगर अधिक लोग अपने फायदे के लिए ही करते हैं, सच में तुम्हारे साथ बिताया हुआ हर पल, मेरे दिल को बहुत ही करीब है, मैं इस पल को किसी लेख_ का रूप दे रहा हूं, तुमने तो हमेशा मुझे अपने समान ही बिठाया है_ मैं इतना बड़ा तो नहीं_ पर तुम मेरा सबसे बेस्ट फ्रेंड हो, यकीन मानो जिंदगी के, वह हसीन पल मैंने तुम्हारे साथ बिताए हैं, काश वो दिन फिर से चले आते, अगर मुझे मौत आती है, तो उससे पहले मैं तुमसे, अपनी बातें रखना अजीब समझूंगा, मैं तुमसे दिल खोल कर, बातें करना चाहूंगा, और हम दोनों के ठहाके से, हमारे गम हमारे पास से, दूर खड़ा हो जाएगा, यकीन मानो, मुझे तुमसे बिछड़ने का, गम इतना है, कि तेरे जैसा है दोस्त दुनिया में, खोजता फिरता हूं, लेकिन मैंने आज तक , तुमसा नहीं पाया, हां जीवन में एक ही बार, सबको ईश्वर एक बेस्ट फ्रेंड देता है, और तुम मेरे प्रिय मित्र बाबू मैं तुम्हारा शुभम कुमार. .
Mujhe likhna Achcha lagta hai, Har Sahitya live per Ham Kuchh Rachna, prakashit kar rahe hain, pah...