Ramesh Babu 25 Oct 2025 आलेख समाजिक जीवन एक शतरंज 9635 0 Hindi :: हिंदी
जीवन वास्तव में एक शतरंज का खेल है, जिसमें हर व्यक्ति एक मोहरे की तरह चलता है। कभी कोई राजा बनता है, कभी रानी, तो कभी केवल एक प्यादा। हम सभी अपने-अपने जीवन की बिसात पर संघर्ष कर रहे हैं, जीतने की चाह में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि इस खेल के असली खिलाड़ी हम स्वयं नहीं हैं, बल्कि कोई और है — वह परमशक्ति, जो हमारे कर्मों और परिस्थितियों को नियंत्रित करती है। मनुष्य अपने जीवन में योजनाएँ बनाता है, भविष्य की सोचता है और अपनी चालें चलता है, परंतु कई बार उसकी चाल को नियति बदल देती है। ठीक वैसे ही जैसे शतरंज में विरोधी की एक चाल पूरी बिसात की दिशा बदल देती है। यही कारण है कि मनुष्य को अपने हर कदम में संयम, धैर्य और विवेक रखना चाहिए। क्योंकि यह खेल केवल जीत का नहीं, बल्कि समझ और अनुभव का भी है। कभी-कभी हमें लगता है कि हम हार गए हैं, पर वास्तव में वह हार हमें एक बड़ी जीत की तैयारी करा रही होती है। शतरंज में प्यादा भी जब अंत तक पहुंचता है तो रानी बन जाता है, वैसे ही जीवन में भी संघर्ष करने वाला व्यक्ति एक दिन ऊँचाइयाँ छूता है। इसलिए हमें अपनी भूमिका को समझते हुए पूरे समर्पण के साथ अपनी चालें चलनी चाहिए। जीवन की इस बिसात पर हर व्यक्ति का अपना महत्व है। राजा बिना प्यादों के कुछ नहीं, और प्यादे बिना राजा का अस्तित्व अधूरा है। हर व्यक्ति इस खेल में किसी न किसी रूप में योगदान देता है। बस ज़रूरत है अपने कर्म को सही दिशा देने की। अंततः यह याद रखना चाहिए कि हम सब इस शतरंज की बिसात पर केवल मोहरे हैं, और खेल चलाने वाला कोई और है — वही जो सही समय पर सही चाल चलता है। हमारा कार्य है अपनी भूमिका को ईमानदारी और साहस से निभाना, क्योंकि यही जीवन के खेल की सच्ची जीत है।