Ujjwal Kumar 27 Jul 2023 आलेख प्यार-महोब्बत हमारी अधूरी मुलाकात। 33962 0 Hindi :: हिंदी
मैं इंतजार करूंगा तुम आना ज़रूर अलविदा तुमने कहा था । कोई पूछे तो ये बताना जरूर । एक तरफा ही सही मगर महगा था इश्क मेरा। कोई करे मुझसे भी ज्यादा मोहब्बत तो एक दफा उससे मिलाना ज़रूर। यू हादशो का बहाना दे कर बहुत से रिश्ते टूट जाया करते है । जो सिखाए दूसरो को मुहब्बत एक ऐसा रिश्ता तुम बनाना ज़रूर। और मैने तो मागी थी हर दफा वेवजह गलतियों की माफी तुमसे । कोई पूछे खामियां तुमसे तो एक बार मेरी माफिया गिनाना ज़रूर। हां मना की डोर बहुत कच्ची थी रिश्ते की हमारी । अनकही बात भी समझ जाती थी तुम कभी ऐसी मोहब्बत थी तुम्हारी । जैसे हर शाम हर अल्फाज तुम पर सजाया करता था । क्या ? वो भी लिखता है किताबो में मोहब्बत तुम्हारी । अच्छा सुनो पुराना अहसास बन जाओ तुम । जैसे पहले मिला करती थी एक दफा फिर से कही मिल जाओ तुम । बहुत अर्शा हो गया तुम्हारा दीदार किए इन आखों को। जूठा ही सही एक दफा दोस्त बन कर गले से लगाओ तुम । चलो माना तुम मेरी नही उसकी बन कर रहना । कभी याद आए मेरी तो मेरे बारे मैं भी मत कहना । मैं खुद चला आऊंगा तुम्हारे खुवाबो में एक हसी दासता बन कर । अगर हो सके तो तुम भी मेरे खुवावो मैं हसी जन्नत बन कर आना । हां माना कि कभी मिलेंगे तो ख़ास मुलाकात नहीं होगी । कुछ तुम चुप रहोगी और शायद तुमसे बात नही होगी । मन तो करेगा जी भर कर निहारू तुम्हे और बाहों मैं भर लूं तुम्हे । पर ऐसी गुस्ताखी में कैसे करू । अब मेरी वो औकात नहीं होगी । और ये सूरज, ये आसमा, ये चांद, तारे ये वारिश गवाह रहेंगे तेरे वादों के । जिस दिन सजोगी किसी की दुल्हन बन कर । उससे ज्यादा बेवफ़ा कोई रात नही होगी। और तुम्हे मेरा हमसाया समझ कर जिक्र किया करते है लोग । अब उन्हें कौन बताए कि तुम जा चुकी हो । तुम फिर से मेरी परछाई बन जाओ ऐसी कोई रात नही होगी । और वक्त लगा था तुम्हे वक्त से छीनकर अपना बनाने में। सोचा ना था की फिर कभी बात नही होगी । अच्छा सुनो मैं इंतजार करूंगा तुम आना ज़रूर। अपने किए उन वादों को निभाना ज़रूर । अगर खामियां दोनो की है तो एक बार इस रिश्ते को मुक्कमल करना ज़रूर। ✍️ उज्ज्वल कुमार