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दासता हमारी

धर्मपाल सावनेर 30 Mar 2023 आलेख हास्य-व्यंग दर्द # भरी# शायरी # नज़्म #धरम# सिंग#राजपूत 37098 0 Hindi :: हिंदी

कितने हसीन पल थे  जब हम तुम मिले थे 
वो राते वो बाते वो वो लम्हे वो मुलाकाते।।
ना तुम्हे नींद अति थी ना हमे चेन आए
एक दूजे की बाहों में सारा वक़्त गुजर जाए।।
 हम तो भूल ना पाए क्या तुम भी याद करते हो
मेरी तरह क्या तुम भी आंखो में पानी  भरते हो 
मेरा दिल तो कहीं भी लग ना पता है 
आंखो को सारी सारी रात जागता है
खेर छोड़ो बीती बातें बीते लम्हे बीती तादे
जैसे भी हो जहा भी हो कुछ याद ना करना खुश रहना
हो सकता है शायद खुदा ने साथ हमारा लिखा नहीं 
जिस्म होते है जुदा  रूह होती है जुदा नहीं 
यही सोच लेना के  कोई तुमसे मिला नहीं 
ये सब सरा सपना था सच में कुछ ऐसा हुआ नहीं।।

       धरम सिंग राजपूत
      8109708044

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