Pinky Kumari 13 Jan 2025 आलेख अन्य 24710 0 Hindi :: हिंदी
आज मन कुछ उदास सा है। क्या कहूँ और क्या नहीं पिछे मुड़ कर देखती हूँ तो डर भी लगता है। और अच्छा भी यही बात भविष्य को लेकर है। पता नहीं आगे क्या होगा जिन्दगी आगे क्या बन जाए कुछ पता नहीं चलता डर लगता है। एक - एक कदम रखने पर कभी तो ऐसा लगता है। कि मैंने जन्म नहीं लिया मेरे अन्दर पल रहें डर ने जन्म लिया है। मुझे नहीं पता कि में क्यों डरती हूँ इतना शायद बोझ बन गई हूँ अपनों पर या अपने पर आखिर कितना अच्छा सोचू अपने को लेकर हिम्त हार सी बेठी हूँ जरूत नहीं है। मुझे किसी सहारे कि क्या पता कब धोका देजाए कोई जब हम जीवन कुछ नहीं कर पाते है। तो अपने आपको असहाय और बेसहारा महसूस करते है। कभी तो लगता है। कि पुरा जीवन ही सुन्दर है। और कभी लगता है। कि में ही बोझ हूँ इस जीवन पर कुछ नजर नहीं आता है। अब कोई । फिर भी ना जाने क्यों जिन्दा है। एक आस पर डर - डर कर आधा जीवन जीलिया अब पता नहीं कितना और जीना है। डर कर कितना ही छुपालू अपने डर को पर कमबख़्त अपनी औकात दिखा ही देता है। सबको समझा कर हार गई में कि कोई तो देखों मेरी और कौन है। मेरा कोई तो रहों साथ मेरे सब ने अपना रस्ता बना लिया और में रह गई सबके रस्तो पर चल कर अकेली कोई तो सुनों मेरी बात कोई तो पूछों मुझसे कि आखिर में क्या चाहती हूँ समय आया ऐसा कि सब साथ तो है पर पास हो कर भी दूर लगता है। पता नहीं कौन कब छोड़ कर चला जाए। सुना है। भगवान सब कि सुनते है। सबके साथ रहते है। सब का भला करते है। पर आज देखती हूँ तो कोई नहीं है। मेरे पास भगवान भी हस्ते होंगे मेरी किस्मत पर वहा क्या किस्मत पाई है। जिन लोगों के लिए पुरा जीवन झोंक दिया आज वही चल दिये छोड़ कर इसे अपनी किस्मत मानू या मेरी ना समझी कौन है मेरा आखिर जिसे में कहूँ कि यह मेरा है। कैसे निकलू अपने डर से चारों और अंधेरा ही नजर आता है अब आँखो में आँसु ही नहीं बचें है। रोने के लिए हंसु या रोऊ कुछ पता ही नहीं है। समय ऐसा है कि सब साथ होते हुए भी अकेला महसूस होता है। जब बाते सुनती हूँ सबकी तो लगता है। कि में ही पिछें रह गई बस एक कारण कि वजह से आखिर लड़की जो ठहरी। होती है कुछ लड़किया मेरी जैसी जों किस्मत पर भरोसा कर के पुरा जीवन जी लेती है। अब वो चाहें अच्छा हो या बुरा क्योंकि उसे सिखाय गया है। कि सब कुछ किस्मत में पहले से ही लिखा होता है। इसी आस में अपना पुरा जीवन जी लेती है। बच्चें जब बड़े हो जाते है। तो अक्सर माँ बाप में कमिया खोजते नजर आते है। आखिर कौन है। मेरा जिसे में कह सकु कि यह मेरा है। अब मन में सपनों कि जगह डर ने लेली है। हर समय डर लगता है कि कौन कब छोड़ कर चला जाए पता नहीं इतनी हिमत नहीं है। कि में उन हालातों का सामना कर सकु हुआ कुछ नहीं है। ज्यादा सोंचना अब मेरी आदत बन चुकी है। अक्सर ज्यादा सोंचना गलत नहीं होता मुसिबत तब बन जाति जब चारों और सें सब खत्म सा होते देखें भाई - भाई ना रहे दुश्मन बन चुके एक दूसरे के पता नहीं क्यों कुछ ज्यादा रही समझदार हो चुके है। जिन्दगी को कुछ ज्यादा ही बारीकी से जिने लगें है। जिस माँ को मेरी कहते थें आज वहीं माँ तेरी बन कर रह गई आज आँखे देखती है। कभी तो रंग लाएगी मेरी परवरिश पर इसी आस में पुरा जीवन विद्धा आश्रम में गुजार देती है। आखरी सांस तक देखती है कि अब तो आएँगा मेरी चिता को आग लगाने पता नहीं जीवन इतना कठिन क्यों है। जब नजरे चारों और जाति है। तो रोंना आता है। किस - किस कि किस्मत ऐसी लिखी है। पाँओं तलें जमीन खिसक जाति है। अपनों का धोंखा सह कर सोंचती हूँ । क्या में इतनी बुरी हूँ। तभी तो कहते है। कि किसी को कभी ऐसा मत बोलों कि उसके जाने के बाद पछताना पड़े आखिर कितना डर है। जो मुझे रुलाय जा रहाँ है। मेरा पुरा जीवन डर में ही चला गया पता नहीं क्यों डरती हूँ इतना इसी बोझ तलें जीवन जीए जा रही हूँ। जीवन में अब शांति चहिए जितना शांति कि तरफ जाति हूँ तो डर पिछें चला आता है। बहार का डर इतना नहीं सताता जितना अन्दर सताता है। बहार के डर का हर कोंई सामना कर लेता है। पर जब अन्दर ही अन्दर डर सताएँ तो जीवन बोझ सा लगता है। मेंने किसी के साथ आज तक बुरा नहीं किया पर ना जाने किस जन्म की सजा मिल रहीं है। पर एक आस है। भगवान से कि वो किसी के साथ अन्य नहीं करते आज नहीं तो कल कभी तो अच्छा होंगा इंसान के अन्दर बहारी मजबुती हों या ना हों पर आन्तरीक मजबुती जरू हों और मजबुती है। मानसिक और मन कि मजबुती और अपनी भावनाओं पर मजबूती होनी बहुत जरूरी है। तभी इस जीवन को जी सकता है। आज मन किया कुछ अलग लिखने का शायद आप लोगों को जरूर पसंद आयें में नकारात्मक नहीं हूँ पर मेंने जो लिखा है। वो सभी सच है। डर सभी में होता है। जो डर पर विजय पालें तो जीवन आसान लगता है। डर को इतना ना पालें कि वह बीमारी बन जाएँ डरें नहीं जिसने जीवन दिया है। वह हमारे साथ है। किसी ना किसी रूप में क्योंकि भगवान किसी के साथ अन्याय नहीं करते वो हर समय हमारे साथ डरें नहीं एक लम्बी सांस ले और अपने ईष्ट को याद करें और अपना कर्म करें हिम्त तो देती हूँ अपने आप को पर मेरा ज्यादा सोंचना मेरे जीवन कि मुसिबत बन चुकी है। भगवान सबकी सुने और अपनी कृपा सब पर बनाएं रखें यही आंशा करती हूँ एक दो शब्द रह गएँ पता नहीं क्या लिखु मेंने सोंचा यहीं लिख दूँ धन्यवाद ✍️✍️🙏🙏👍👍🥰🥰😍🥰🥰😍😍😍😍
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