virendra kumar dewangan 12 Oct 2023 आलेख अन्य Sports 33653 0 Hindi :: हिंदी
चीन के हांगझू में सितंबर-अक्टूबर 2023 में आयोजित 19वंे एशियाई खेल में 660 सदस्यीय भारतीय दल ने कमाल का प्रदर्शन करते हुए 28 गोल्ड सहित 107 पदकों पर कब्जा जमा लिया। भारतीयों को सबसे अधिक 7 गोल्ड निशानेबाजी में मिला है। पदक हस्तगत करने में भी महिला खिलाड़ियों की हिस्सेदारी लगभग आधी रही। महिलाओं ने पहली बार क्रिकेट, टेबल टेनिस, गोल्फ, घुड़सवारी सहित कई खेलों में पदक जीते, जो न केवल काबिलेतारिफ व ऐतिहासिक है, अपितु भारतीय किशोर-किशोरियों व नवयुवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत भी है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि भारतीय महिलाएं विदेशी महिलाओं से किसी मायने में कम नहीं हैं। यह ऐतिहासिक इसीलिए है कि इसके पहले एशियाई खेल मंच पर भारतीयों ने इतने पदक कभी नहीं जीते थे। ऐसा धांसू प्रदर्शन दुनिया के लिए एक संकेत भी है कि अब भारत का युवा जाग चुका है और वो खेल महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। इससे भारतीयों की यह धारणा भी टूट गई है कि ‘खेलोगे-कूदोगे, तो बनोगे खराब; पढ़ोगे-लिखोगे, तो बनोगे नवाब’। अब, खेलों में भी अच्छा व उम्दा प्रदर्शन कर अपने कैरियर को बेहतर बनाया जा सकता है और नाम, यश व पैसा कमाया जा सकता है। सच्चाई यह भी कि इसके पीछे खिलाड़ियों सहित खेलसंघों व संस्थानों के पदाधिकारियों व सहयोगियों की बरसोंबरस की कड़ी मेहनत, पक्का इरादा और जीतने का जज्बा है, जो उन्हें इस मुकाम तक ले आया है कि अब वे प्रतिबद्धता के साथ आगे और आगे बढ़ते जाएंगे और आनेवाले सभी अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपना जल्वा बिखेरेंगे। इससे आनेवाले पेरिस ओलंपिक में भारतीय खिलाड़ियों की दमदार मौजूदगी की धमक भी देखी जा सकती है। यह उपलब्धि 2014 में लागू टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना की देन कही जा सकती है, जिसके तहत एथलीटों को विदेशी तकनीक का अनुभव, अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण, विश्व के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षक, खेल उपकरणों और आहार सुविधा प्रदान की जाती है और एथलीटों को प्रतिमाह आकर्षक मानदेय प्रदान किया जाता है। यही नहीं, 2017 में शुरू ‘खेलो इंडिया’ कैम्पेन ने भी इसमे अहम भूमिका का निर्वहन किया है, जिसका ध्येय जमीनी स्तर पर प्रमिभा की पहचान करना और उन्हें राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार करना है। एशियाई खेलों में पदक विजेताओं में 125 खिलाड़ी खेलो इंडिया कैंम्पेन का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने 40 पदक अपने नाम किए हैं। इससे प्रधानमंत्री मोदी की यह धारणा भी फलीभूत होती नजर आ रही है कि ‘खेलोगे, तो खिलोगे’। वाकई यह तो खिलने, मुस्कुराने और जश्न मनाने का समय है। प्रधानमंत्री ने पदक विजेताओं से आग्रह भी किया है, ‘‘इस समय देश ड्रग्स व डोपिंग के विरूद्ध एक निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। मैं चाहता हूं कि आप स्कूलों में जाएं और छात्रों को बताएं कि पदक जीतने का सही तरीका क्या है?’’ अब, 20वां एशियन गेम्स 2026 में जापान के नागोया शहर में होगा। इसी के साथ भारत को इसके आगे के एशियन गेम्स, कामनवेल्थ, ओलिंपिक और पैरा ओलिंपिक की मेजबानी के लिए दमदार दावेदारी करनी चाहिए, ताकि भारत पूरी तरह से खेल राष्ट्र बनने में कोई कोर कसर उठा न रखे। --00-- आलेख पढ़ने के लिए धन्यवाद। कृपया अधिकतम लाईक, कमेंट व शेयर करें। ---00--- सुधी पाठकों से अनुरोध है कि वे लेखक के द्वारा सृजित कहानियों व धारावाहिकों का आनंद लेने के लिए प्ले स्टोर के माध्यम से ‘‘प्रतिलिपि एप’’ डाउनलोड कर सकते हैं और उसमें ‘‘वीरेंद्र देवांगन’’ सर्च करके लेखक की तमाम रचनाओं को पढ़कर समीक्षा में बता सकते हैं कि उसमें रोचकता है या नहीं। --00--
लेखक-परिचय लेखक शासकीय सेवा से सेवान�...