Sangeeta Tyagi 30 Mar 2023 आलेख अन्य 78891 0 Hindi :: हिंदी
विदाई के बाद बेटी ससुराल जाती है, नये रिश्तों को अपना बनाने के लिए माँ को भूल जाती है। कभी,ये कभी वो नित नए बहाने बनाती है।बेटी आएगी कब ? इसी इन्तजार में,माँ की साँसों की डोर टूट जाती है। अपने बच्चो में मुशरूफ़ बेटी माँ को भूल जाती है। समय गतिशील है, बच्चो के विवाह हो गए। बच्चे भी अब अपने बच्चों में मुशरूफ़ हो गए। अब बेटी को माँ की याद आई और बोली, माँ अब मुझे फुर्सत है ,तु आजा तेरे बिन मैं हूँ अकेली। माँ तो नही आई, माँ की याद आई। अब ना माँ थी ना माँ की परछाई। 😌