मुख चमका न्यू चांद चमक रहा र गोरी ले छतरी की ओट बरस रहा र, गोरी ले छतरी की ओट बरस रहा रे -२
तेरी ठोडी ऊपर काला तिल जच रहा र-२
"सामण महीना आ� read more >>
शीर्षक ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
(अबुल पाकिर जैनुलअब्दीन अब्दुल कलाम)
देश के सपूत थे, देश के लिये अटूट थे।
भाई चारे का दिया सन्देश। कर गये ह� read more >>
में जानता हूँ की मुकम्मल इंशा भी नहीं हूँ ,
मगर हाँ वो कहती थी की में उसका खुदा हूँ.
गिरजेश
(Facebook page- learn film script writing in hindi) read more >>