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उसके पूर्वज, सरपट दौड़ लगाते थे। अठखेलियों संग, शिकार करना सिखाते थे। दहाड़ से पूरा क्षेत्र, थर- थर‌ थर्राता था। कभी दुबक, कभी लपक, कभ� read more >>
(आज कर सो अब कर अब कर सो आज कर) सफलता तब प्राप्त होगी जब हम अपने जीवन में एक लक्ष्य को जटिल महन्त लगन के साथ कायम करेंगे।। सफलता हर इंसान read more >>
हर सवाल का जवाब होता है, हर इंसान का एक ख्वाब होता है। कि मैं दुनिया का चमकता हुआ सितारा बन जाऊ, ऐसा कुछ कर जाऊं कि मरने के बाद भी लोगों क� read more >>
अपनों का दर्द तो सब समझते हैं, दूसरों का दर्द भी समझ लेना चाहिए, जो अपनों का दर्द समझते हैं, उनमें अपनों का प्यार बसता है, जो दूसरों का भ� read more >>
सोचते हैं हमें अपनी मंजिल मिल गई, पर वो एक धोखा होता है, अंधेरे में क्या तीर चलता है। read more >>
ना जाने जिंदगी के कितने रंग देख लिए, सोचते हैं कौन सा रंग रह गया, अच्छ बुरा सब देख लिया। read more >>
शाम देख कर मन ललचाया घर से बाहर जाने को, वृक्ष गणों की महक उड़ चली आसमान अपनाने को । घर से बाहर निकला तो दिखी खूब हरियाली थी , आसमान था � read more >>
शीर्षक (सुबह) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) रात्री कर पहरा खत्म होने को है,एक नई सुबह होने को है। प्रातः काल की बेला है आयी, दृश्य मनोरम read more >>
दीपक झिलमिला रहा है एक हवा का आया झोका, अंधेरे को आने का मिला मौका, दीपक........ दीपक मैं बहुत था तेल और बाती, मैं छुपा लेता दीपक को नजर न आई ह read more >>
जिस तरह हर मौसम की अपनी - अपनी बात होती है उसी तरह हर इंसान के अंदर कुछ खामियां भी होती है। धन्यवाद read more >>
लिख दिया मान लो कुछ नहीं, स्वप्न छोटा था मगर नींद पूरी नहीं। अपनों के लिए बहुत है यहां, मगर दूसरों के लिए आंख रोती नहीं। वो दीपक हूं जो � read more >>
शब्दों की माला से, गूंथा हर क्षण को। जीवन ऐसा उछल पड़ा जैसे जल तरंग हो। हार जीत को माना रण का अंतिम हथियार। जीत सकेंगे वही तो, छल ना सक� read more >>
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