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कदमों में अम्बर को झुका देंगे। खुशी के रंग पथ में सजा देंगे। मोहब्बत मोहब्बत से ही मिले _ तेरे आगे हम दिल बिछा देंगे।। (स्वरचित मौलिक) read more >>
मोहब्बत से चलती है दुनिया। फिर सजती है मानव की गछिया। दौलत से नहीं ताकत से नहीं _ आपसी मेल से चलती दुनिया।l (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार read more >>
“मेरा हमसफ़र” जब जवां हुऐ थे जज्बात हमारे हुए एक दिन पीले हाथ हमारे, फिर घर आयी उनकी बारात हमारे कदमों से कदम मिला के चले वो साथ हमारे। read more >>
‘‘ठोकरें’’ जब तक न लगे ठोकर कुछ भी न पता होता है, आसान है, सब दुनिया में बे फिक्र होके सोता है। ख्वाबों में ही रहता है और सपने संजोता � read more >>
आई बरसात बहुत ही सुंदर अंदाज में l मौसम को कर सुहाना गीत गाई साज में l इंतजार था सबको गरमी कब दूर होगी _ एक खुशी आई है अब सबकी आवा� read more >>
‘‘देखा एक संसार अनोखा’’ हाय ! मैने यह क्या देखा रब्बा तेरा संसार अनोखा कहीं बाढ़ कहीं सूखा देखा कहीं नंगा कहीं भूखा देखा। जिसको बीज read more >>
सपनो की परी बन जब तुम सामने आती हो। रेशमी वस्त्रों में लिपटी अति झिलमिलाती हो। जन्नत सा नजारा का दर्शन कर मैं होता खुश_ बेपनाह मोहब्ब� read more >>
वह दौर था 1951 का, कल्याणबीघा के गाँव में जन्मे थे जी। बचपन से सपना लिए थे, सुधारेंगे बिहार को एक दिन जी। किस्मत को कुछ और मंजूर था, पहुँच� read more >>
समतौण एक बुढ़ड़ी बोलण लगी, कि यूंकि सुख-सुविधाऐं सबा गाड़ा बगी कोई कासी कि ना सुणदो ये जमाने पार कणी आग लगी। एक जमानो सो तो जब सास ससुर read more >>
“आशा की एक किरण” ख्वाबों की पटरी पर अपनी गाड़ी चल रही है चार दिनों की ज़िन्दगी भी अब खल रही है आहिस्ता आहिस्ता अब ये शाम ढल रही है सुना ह read more >>
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