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દરવાજા બે હતા, છતાં એક જ રસ્તો સામે હતો; મળવાનું નસીબ ક્યાં? સમયનો પહેરો સામે હતો. બારીમાં દીવો રોજ સાંજે ધીમે ધીમે ઝળહળતો, મારી આંખો સ read more >>
मृत्यु होता है क्या मृत्यु का राज खोलती है प्रकृति इसे आज ! परिभाषा है चेतना की खास जुड़ी है प्रभु प्राप्ति की आस! होता है जब शरी� read more >>
नहीं समझते भाव सभी, अच्छे मन के विचार, जैसी मत है वो, वैसा समझे कैसे उसको समझाये। read more >>
सबसे बड़ा कर्म है, दिल ना किसी का दुखाना, चाहे ना करना पूजा पाठ, ना चाहे ध्यान प्रभु का लगाना, भूखे को भोजन, प्यासे को पानी पिलाना, जो आ read more >>
लहरों में दबा सच अलवर की सुबह धीरे-धीरे अपने रंग में उतर रही थी। अरावली की पहाड़ियों के पीछे से सूरज की पहली किरणें निकलकर शहर की पुरान read more >>
एक सवाल “ बांझ “ किसने बनाया यह शब्द, “भगवान” या भगवान के नाम पर “ इंसान ” किसने ? निश्चित किया - “ कोख “ से एक स्त्री की पहचान, नहीं उठी read more >>
कहानी शीर्षक : सेवाभाव सविता की नजर दीवार घड़ी पर अटकी हैं I 2 बज चुके हैं I अभी तक उदय स्कूल से घर नहीं आया हैं I उसे 15 read more >>
आधी उम्र साथ में चलकर थम जाते है कुछ कदम बढ़ाकर यूं तो अजनबी नहीं थे हम बेटियों से कभी गूँजता था घर आंगन।। कर देते हैं पराया कुछ पल मे read more >>
પોતાની બુદ્ધિ ગીરવે મૂકી, ટોળાની પાછળ ચાલે છે, પોતે જ દિશાહીન હોવા છતાં, જગતને દિશા બતાવે છે! કર્મ કર્યા વિના સફળતાનાં સ્વપ્નો રોજ સજ read more >>
बहुत पहले की बात है राम सौगार्थ नाम का एक व्यक्ति मुंबई में रहते थे। पेशे से वे एक कांट्रेक्टर थे। बहुत सारे कंपनियों में उनका कांटेक् read more >>
तब तक ये चलता रहे, जब तक इसमें मैं जो मै इस से जुदा हुई, ये कुछ भी ना है read more >>
गलती एक ही सही पर बार बार गिनी जाती है अच्छाइयां सौ ही क्यों न हो पर उसकी गिनती एकबार भी नहीं होती...!! धन्यवाद🙏🏻 read more >>
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