स्वरचित रचना--- वह तो मजदूर है ....!
संदर्भ--- मजदूर
जिनकी पेशानी के बल पर
इस संसार की संरचना होती है।
ऐसे उन असंख्य मजदूरों की
पीड़ा में य read more >>
मेरी माँ के घर के दीपक से , ये सूरज फीका लगता है |
मेरी माँ के घर के आँगन से , मुझे यह शहर छोटा लगता है ||
हम लाख कमा ले दुनिया ज़हान की सारी दौल read more >>
स्वरचित रचना--- सितारों की दुनिया से ...
संदर्भ- प्यार-मोहब्बत!
सितारों की दुनिया से चल करके कोई
मेरे दिल में आकर गया बस है कोई!
हजारों न� read more >>
स्वरचित रचना- यह देश सुधरने वाला है?
संदर्भ--- राजनीतिक व्यय
यह देश सुधरने वाला है?-2
जहां नीचे से लै ऊपर तक, सब घूस पै चलने वाला है।
यह दे� read more >>
कोई फिर से मेरा बचपन दिला दो,
वो कपड़े की गेंद, लाठी का बेट,
छोटी से मैदान में, टीमें हो जाती सेट,
वो भरपूर मजा क्रिकेट का दिला दो,
कोई फिर स read more >>
मत दिखा मुझे ये तेरी शोहरत के पन्ने,
उन्ही पन्नो की किताब हूँ मैं,
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तू सूंघ रही है जिन महुआ के फूलो को,
उन्ही से बनी शराब हूँ मैं,
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और तुझ read more >>
क्यू रोता है ऐ-नीर, यहां पंख निकलते ही परिंदे उड़ान भरते है,
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भनक लगी है तेरी खनक की उन्हें, तभी वे दरिंदे कान भरते है,
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और ये जो रिश्तो के � read more >>