हार जीत के दाव में, फसा जगत के लोग।
मन से अथक प्रयास कर,पाते सुख का भोग।
जीत सुनिश्चित कर चलें,रखें सत्य का ज्ञान_
खुशियों से जीवन चले, द� read more >>
बहर:_2122,2122,2122,212
मैं चला हूं अब, सजाने फूल से तसवीर को।
बदल लूंगा श्रम, कड़ा कर नीच सी तक़दीर को।
तुम नगीना हो, खजाने की सजा दी हो मुझे_
खत्म � read more >>
जिंदगी कभी इतनी छोटी सी लगती है कि पता नहीं चलता कि ये पल कब गुजर गए, अपने ही नाराज होने लगते हैं आज कल ये कैसा दिखवा है पैसा इतना बड़ा हो � read more >>
हां माना औरत हूं मै समाज की बेड़ियों से बंधी नायाब शौहरत हुं,मैं तो चलो एक मुलाकात ख़ुद के साथ हो जाए, एक कोशिश ज़माने के साथ हो जाए पर उल read more >>