प्रेम की स्वप्निल डगर पर
दो तरफ हम एक पथ पर
पुलक चलते, समानांतर
पर कभी जुड़ने की कोई आस न हो
प्रेम हो, पर मिलन की कोई प्यास न हो!
एक सखी � read more >>
कविता . -हंसी खो गई है।
रचना -जितेन्द्र शर्मा।
तिथी -14/01/2023
सब कुछ तो है, बस हंसी खो गई है।
पेड़ से उतर हमने अट्टालिका भवन बनाये हैं।
सोन read more >>
Blue T-shirt वाले
जब तुम्हें देखा चाय के तब्बी पर
दिल मेरा हो गया था बेखबर
क्या करे इस दिल का
हर जगह सिफ तुम्हे हि धुंधे
जब तुम मुस्कुरा कर च� read more >>