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बंद आखो से संपने
मत देखो बंद आखो से संपने वो तो अकसर तूट जाते है! अगर होसला हो आसमान की उचाईसे संमदर की गेहराई नापने का तो खुली आखो से भी सपने दिख जाते ह
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हरि_प्रेम
प्यारे तारे हरि लगे, लगते तुम हो चांद। दिव्य सितारे आप ही,होते कभी न मांद।। सदा सहारे आप प्रभु,अभिलाषा भी आप। मंजिल भी हो आप ही, करूं आ�
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वृंदावन सुखधाम है
वृंदावन सुखधाम है, जहां अटल अभिराम। राधा रमण निवास से, कण कण है गुलफाम।। वृंदावन सुखधाम है,सुन्दर मृदुल स्वभाव। प्रेम धार में मग्न स�
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मेरी माँ
जीवन में बढ़ते संघर्षों को देख कर माँ मेरा जी घबराता है । इस रंग बदलते जीवन में कहा माँ दिल को चैन आ पाता है । कभी मैं सोचती हूं माँ
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बेटी जन्म बधाई गीत
तर्ज=. गांव में जाके टेर लगाई,ऐ जा जा सबके द्वारों में, फुग्गा लेलो वालों में। सबरे जाके कुंडी बजाई,ए जा जा सबके द्वारो में, भइ मौड़ी बहा
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बेटी जन्म बधाई गीत
तर्ज=. गांव में जाके टेर लगाई,ऐ जा जा सबके द्वारों में, फुग्गा लेलो वालों में। सबरे जाके कुंडी बजाई,ए जा जा सबके द्वारो में, भइ मौड़ी बहा
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संघर्ष करो
तुम थोड़ा तो संघर्ष करो। बढ़ चले चलो आगे मग में कांटों को चुभने दो पग में डटकर बाधा स्वीकार करो दुविधा को जीतो पार करो जो मिले उसी स�
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मैंने अपने दिल में
जाते - जाते तुम्हारा नाम लिख दिया मैंने अपने दिल में ये तुम्हारी नहीं मेरी गलती है कि हद से ज्यादा भरोसा जगा लिया मैंने अपने दिल में।
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कहते नहीं
यूं तो हम किसी से कुछ कहते नहीं पर,जब कहते हैं ,तो सामने वाला मुंह खोलते नहीं। धन्यवाद
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मेरा प्रिय मित्र
मैं जब चौदह साल का था तब मैं एक अनजान व्यक्ति से मिला मैं नहीं जानता था कि वह कौन है और न ही वह मुझे जानता था हम दोनों विधालय साथ जाने लगे
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मन कहता है
मन कहता है कुछ ऐसा लिख दूं मैं अपने मन के भाव को शब्दों में व्यक्त कर दूं मैं ऐ मन तुम चाहो तो मैं कुछ ऐसा लिख दूं जो जीवन की कड़वी स
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*तुम विदेश क्यों जाते हो*
*तुम विदेश क्यों जाते हो* छोड़कर अपनी मातृभूमि को तुम विदेश क्यों जाते हो अपने स्वार्थ की खातिर तुम क्यों परदेशी बन जाते ।। मात-पित�
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