ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है,
आसमां में रहकर भी धरा के करीब है,
मैं लिख रहा हूँ
मेरे कल्पित विचार
मेरी लेखनी से,
तुझ से ही करवाचौथ,
तु� read more >>
स्वरचित रचना- ए हिन्दुस्तान है,.............।
संदर्भ---राजनीतिक व्यंग
ए हिन्दुस्तान है,
जहां न्याय टिका सबूतों पर,
सबूत लाओ,
तभी सरकार यहां स read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................!
संदर्भ---गम ए जुदाई
जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा।
आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा
आज बादल उमड़ पड़ read more >>
छोड़ना ही था तो आए क्यूँ थे... ??
जब छोड़ ही चुके, थे तो आये क्यूँ हो...??
आवाज मेरी कहीं मर सी गई थी बरसो पहले बहुत शांत रहती थी खुद को कहीं दफन� read more >>