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नफरत है मुझे खुद के किरदार से; वहम की कोई दवा नही होती, वो कहती है कि मिट जाऊंगी तुझ पर; पर झुर्रियां कभी जवां नही होती, और जब चिल्लाती � read more >>
एकलव्यी बाण मारती थी वो मेघदूती बाण मार रही है तू, वो तो शिरीष का था फूल जो टूट गया झट से, अब टहनी जो बची है उसे भी तोड़ रही है तू। read more >>
ऐ- चांद तू सोच कितना खुशनशीब है, आसमां में रहकर भी धरा के करीब है, मैं लिख रहा हूँ मेरे कल्पित विचार मेरी लेखनी से, तुझ से ही करवाचौथ, तु� read more >>
स्वरचित रचना- ए हिन्दुस्तान है,.............। संदर्भ---राजनीतिक व्यंग ए हिन्दुस्तान है, जहां न्याय टिका सबूतों पर, सबूत लाओ, तभी सरकार यहां स read more >>
स्वरचित रचना---जिंदगी न सही,................! संदर्भ---गम ए जुदाई जिंदगी न सही, तू मौत ही बनकर आ जा। आ मगर‌ आ,तू इक बार तड़प कर आ जा आज बादल उमड़ पड़ read more >>
मतलब ने हमें मतलब के लिए बुलाया है मतलब ने बारे प्यार से बुलाया है मतलब का मतलब पूरा करने के लिए मैं बेमतलब का चली गई नजाने कब खत्म हो read more >>
अंकुरते हैं- प्रेम हर एक दिल, पर खिलते नहीं- हर एक के दिल। खिल जाते- जिनके दिलों में यह, महक जाते- जीवन के ऐ-चमन।। -मोती read more >>
मुर्गे की बांक पर- उठ जाती अति भोर, धरती को करती- नमन तब रखती पांव। चल आंगन में- आकाश को करती प्रणाम, फिर झाड़ू-बुहार- बर्तन करती साफ।। read more >>
तुम मुझे मनाते हो जब मैं रोना चाहता हूँ तो तुम मुझे हँसाते हो, जब मैं मरना चाहता हूँ तो मुझे जीना चाहते हो, जब मैं भौहें चढ़ाना चाहता read more >>
मैं एक मासूम सी पक्षी मेरा ना कोई बसेरा है सूखा पतझार मिला जो उस पे हि मेरा बसेरा है मैं नन्ही मासूम सी पक्षी कोई ना यहाँ मेरा हैं जब आ� read more >>
वो साथी हो तुम मेरे जो ज़माने कि भीड़ मे भी खुद को रख के देखी हूँ अकेला महसूस नहीं कि हूँ तुम हमेशा ऐसे हि रहोगे किया ये दूनिया का सिर्फ सफ read more >>
छोड़ना ही था तो आए क्यूँ थे... ?? जब छोड़ ही चुके, थे तो आये क्यूँ हो...?? आवाज मेरी कहीं मर सी गई थी बरसो पहले बहुत शांत रहती थी खुद को कहीं दफन� read more >>
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