तेरा अनुराग....
हे अतुल हे अनुप !
जगत में -
सृष्टि का ताज है मानव
तन में-
समा रहे हो,
जीवन के बीज हो तुम
ये जीवन -
जो खिल रहे हैं ,
तुम ही प् read more >>
की हम वो इंसान है,
जो खुदका घर जलाये बैठे है !
हा देखे है बेहद से सपने,
पर खुद अपनी हातो से दफनाये बैठे है !
वैसे तो शम्मे है हम अंधेरो मे,
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