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गरीब की बेटी।
हाथों में दे दिया किसी ने कलम दिल में जगाया पढ़ने लिखने की भावना कलम की नीली स्याही से पन्नों पर लिखना सीखा लिखने पढ़ने में था वह जादू क
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मुझे डर लगता है
मां मुझे डर लगता है . . . . बहुत डर लगता है . . . . सूरज की रौशनी आग सी लगती है . . . . पानी की बुँदे भी तेजाब सी लगती हैं . . . मां हवा में भी जहर सा घुला
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खेलों का डर्टी दंगल या फिर नियमों का उल्लंघन
(7 मई, विश्व एथलेटिक्स दिवस विशेष) *खेलों का डर्टी दंगल या फिर नियमों का उल्लंघन* समय-समय पर खेल जगत से ऐसे आरोप क्यों लगत�
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बात तो सीखी है जिंदगी से,
ज्यादा कुछ नहीं पर एक बात तो सीखी है जिंदगी से, कि, वक्त ने बदलना सीखा दिया और अपनो ने ऐसे गिराया कि संभलना सीखा दिया
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फूलों की वादी
इन फूलों की वादी, जाने कितने की बरबादी। हसरतों की हो गयी आजादी, आँसुओं की बस मिली आबादी।। हर गमों से दोस्ती करना, मेरा न इरादा था। स
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ज़िन्दगी मेरे घर आना
ज़िन्दगी मेरे घर आना - बेटियाँ पराई नहीं, दिलों में रहती है ... एक बार एक गरीब पिता ने अपनी एकलौती पुत्री की सगाई करवाई ... लड़का बड़े �
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जुनून,जज्बात
जुनून, जज्बात कोई एक बात नहीं । फर्क ,बहुत है। इन भावों मे , खौफ दिखा ना । मुझे किताबों का मेने बहुत कागज की नाव पार उतार�
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कविता -तथागत बुद्ध
कविता -तथागत बुद्ध तुम्ही तथागत, बुद्ध तुम्हीं हो तर्कशील प्रबुद्ध तुम्हीं हो। करुणा दया का भाव जगाया तुम्हीं तर्क विज्�
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पापा की परी
पापा की परी बेटी निरमा की शादी हाल ही में हुई थी, कुछ दिनों बाद पहली बार पिता जी बेटी से मिलने उनके ससुराल पहुंचे पिता जी को लगा था, मु�
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छोड़ के जाना ना
मुझे छोड़ कर जाना ना कभी जब आओगे तब हम मिलेंगे ना कभी। धन्यवाद
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जिंदगी बदल गई
तेरे जाने से मेरी जिंदगी बदल गई जब तू आया तब तक मैं बदल गई धन्यवाद
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दिल से शायरी
जन्नत की चाह थी हमें कैसी कीचड़ में आके डुब गए दुसरों को तकलीफ़ न हो चाह में इसकी, खुद की खुशी का ध्यान रखना ही भूल गए।
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