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कल मैंने एक चिड़िया को तिनका उठाते देखा अपने बच्चे के लिए घर बनाते देखा जगह-जगह तिनके को देखे उसकी हर नजर पक्षी होकर करती इतना सबर त� read more >>
अल्फाजों को जोड़ जोड़कर बोलना सिखाने वाले को , घुटनों से पैरों पर खड़े होने तक के सफर को पूरा कराने वाले को अपनी खुशियों को भूलकर तेरी read more >>
कलयुग देता यही दुहाई रहने दूंगा ना मैं भाई को भाई ,मां को भी कर दूंगा एक हद तक पराई . हर दिल में भर दूंगा इतना मैल सब रूपयों का रह जाएगा खे� read more >>
ख्वाहिशों को कल पूरे होंगे -कल पूरे होंगे टालते -टालते हमने जीना सीख लिया । कभी खुशियां मिलेंगी इस सहारे दुखों से लड़ना सीख लिया अब मि read more >>
सुधार आंदोलन और सहकारी प्रयत्नों के फलस्वरूप महिलाओं की स्तिथि में अनेक परिवर्तन और सुधार हुए हैं। पर इस संदर्भ में अब भी बहुत सी सुध� read more >>
वो पूछ रहे थे मेरे घर का पता। मैने उन्हें कुछ इस प्रकार बतलाया। सूनी है सड़के गलियाँ भी सुनसान है। ख़ामोशी का पहरा है, और तन्हाईयों का को read more >>
दोस्ती एक ऐसा शब्द है जिसके लिए शायद शब्द भी कम पड़ जाय, पर मैं डरता हूँ दोस्ती करने से ऐसा नहीं है कि विश्वास नहीं रहा पर कुछ बचा भी नहीं read more >>
यादें बचपन की पांचवीं तक स्लेट की बत्ती को जीभ से चाटकर कैल्शियम की कमी पूरी करना हमारी स्थाई आदत थी लेकिन इसमें पापबोध भी था कि कहीं read more >>
हम बचपन में छुट्टी के बाद खाना खाते ही शुरु हो जाते थे..... फिर जब शाम को वापस खाने का समय होता तब ही वापस घरों को रूख करते थे। आजकल के बच� read more >>
बचपन वाली दीपावली बचपन की दीपावली का मतलब छोटी दीवाली, बड़ी दिवाली और उसके बाद गंगा स्नान (कार्तिकी) की तैयारी हुआ करता था। धनतेरस औ� read more >>
"यादें बचपन की " इस पीले भूरे रंग की वस्तु को देख रहे हैं ना उसे शायद बहुत से लोग पहचान भी रहे होंगे। नई पीढ़ी और शहरों के लोग शायद ना भी read more >>
यादें बचपन की आज के समय में पेंट करना बहुत आसान काम है, पेंट का डिब्बा खोलो, रोलर डुबाओ और घुमा दो, हो गया पेंट। एक समय था कि हमारे बचपन read more >>
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