कलयुग देता यही दुहाई रहने दूंगा ना मैं भाई को भाई ,मां को भी कर दूंगा एक हद तक पराई .
हर दिल में भर दूंगा इतना मैल सब रूपयों का रह जाएगा खे� read more >>
दोस्ती एक ऐसा शब्द है जिसके लिए शायद शब्द भी कम पड़ जाय, पर मैं डरता हूँ दोस्ती करने से ऐसा नहीं है कि विश्वास नहीं रहा पर कुछ बचा भी नहीं read more >>
हम बचपन में छुट्टी के बाद खाना खाते ही शुरु हो जाते थे.....
फिर जब शाम को वापस खाने का समय होता तब ही वापस घरों को रूख करते थे।
आजकल के बच� read more >>