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आबाद तो करो-एक बार हमें याद तो करो
हमीं सिर्फ याद करते हैं, खुद को बरबाद करते हैं। एक बार हमें याद तो करो, याद करके आबाद तो करो। अब तो न आते है सपने, न आती है हिचकियाँ। �
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फूलों की यही कहानी है-आज खिले कल मुरझा जाना है
फूलों की यही कहानी है, आज खिले कल मुरझा जाना है। यही रिश्तों की निशानी है, आज जुड़े, कल बिछड़ जाना है। मैं अपनी तलाश में हूँ, मैं आ गय�
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मैं तुझसे प्यार करूँ-मैं तेरा यार बनूँ
तू मेरा यार बने, मैं तेरा यार बनूँ। तू मुझसे प्यार करे, मैं तुझसे प्यार करूँ। सारी दुनियाँ से करके इंकार, मैं तुझसे इकरार करूँ। तू �
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हममें भी था कुछ खास-जीवन नहीं आयेगा रास
जब हम दूर चले जायेंगे, नहीं होंगे आपके पास, आपको होगा तब एहसास, कि हममें भी था कुछ खास। याद आने से हमारी, जान जायेगी तुम्हारी, बातें �
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कहो धरती पे इसे लाते हैं
हंस हंस कर लोग जलाते हैं, धूप में रोशनी दिखाते हैं। आकाश अपना, उसका रंग अपना, कहो धरती पे इसे लाते हैं। सुधा चौधरी बस्ती
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प्यार छुपा के रखा-दुनिया से छुपा के रखा
प्यार छुपा रखा- तुझे कैसे समझाऊं, दुनिया से छुपा के रखा.. यह चिराग़ से रौशन होगी,, रौशनी के लिए- दर्द-ए-सितम से गुज़र जाऊंगा..!! -मोती
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फ़िक्र कल में बसा संसार
गुज़रे कल- को रोते तमाम, फ़िक्र कल में बसा संसार सो बिरला जान- जो पूर्णत: आज में जीता उसके- दो दिन परमानंद में कटते -मोती
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भूख निगले जा रहा है
भूख निगले जा रहा है! आंखों से दृष्टि गई- जुबान से आवाज भी गई सब मिट गए रिश्ते-नाते,, अब मज़हब- देश-दुनिया तक याद नहीं भूख निगले जा रहा �
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बखरी की कोठरी के ताखा में जलती ढेबरी
यादों के पिटारे से यदि आपने : बखरी की कोठरी के ताखा में जलती ढेबरी देखी है। दलान को समझा है। ओसारा जानते हैं। गाँव के किनारे पर कचहरी
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मेरे जिस्म रूह हो तुम
मेरे जिस्म की रूह हो तुम बेखयाली में भी खयाल हो तुम, नींद में सपने हो तुम गैरों में अपने हो तुम, दिल की धड़कन हो तुम हर मुस्कुराहट मे�
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मेरी गहराई ना समझे समंदर कोई
मेरी गहराई ना समझे समंदर कोई, रहे हालात से मजबूर ना मुकद्दर कोई। सामने से ही चले मिट गए पिछले साये, बुझा ले आग सीने की ना हो बंदिश कोई। �
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जितना कहना था कह चुके हम
जितना सहना था सह चुके हम ् की हमे जो कहना था अब कह चुकी हम हो चुकी अब खामोश हम ना किसी से है शिकवा ना सहेंगे सितम पूरी दुनिया से मुंह म�
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