मोती लाल साहु 26 May 2023 कविताएँ समाजिक जीवन के दो दिन आज और कल, गुजरे कल को रोते तमाम- फ़िक्र कल में बसा संसार- सो बिरला जान- जो पूर्णत: आज में जीता- उसके दो दिन परमानंद में कटते। 27032 0 Hindi :: हिंदी
गुज़रे कल- को रोते तमाम, फ़िक्र कल में बसा संसार सो बिरला जान- जो पूर्णत: आज में जीता उसके- दो दिन परमानंद में कटते -मोती