एक हम थे जो तुम्हारे रंग में रंगने! की चाहत लिए फिरते थे !
एक तुम थे जो हर रंग को !
बेरंग किए फिरते थे !
एक हम थे जो उनकी याद में
दिन रात आं� read more >>
एक शाम, खाली सी एक शाम,
जब अंधेरा छाया, मन में छाए उदासी का रंग।
रात के संग, सन्नाटे में ढूंढे,
कुछ सहारा, कुछ रोशनी, कुछ अपने सपनों के रंग read more >>
किया जो विश्वास तूने अपनों पर बस धोखा ही तो खाया है ,
फिर क्यों तू इतना इतराया है, इसने घर-घर को जलाया ,
रिश्तो ने दे कर दुहाई हर अपने को लू read more >>