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सत्य और- नश्वर का संयोग यह शरीर! जिसकी- प्रकृति में परिवर्तन है, वह सत्य नहीं हो सकता यूंकि, सत्य में परिवर्तन नहीं है सत्य कालातीत � read more >>
सुनो ना, "आज मैंने कई सालों बाद अपनी अलमारी खोली तुमसे जुड़ी हुई बहुत-सी यादें आज भी मेरे पास हैं बसरते उन यादों में एक धुँधली -सी परत जम � read more >>
"पैरों" "जब-जब तुम अपने पैरों को देखोगी, तब-तब उन पैरों मे तुम मुझको देखोगी, वो पाजेब की खनक,वो मेहंदी कि महक़, जब-जब तुम उसको महसूस कर read more >>
"अंतिम यात्रा" ये अंतिम यात्रा है, कुछ अपने है तो कुछ पराये है, तो कुछ पराये हो के भी अपने है, किसी की आँख मे आँसू, तो किसी की आत्मा मे कुं� read more >>
"उम्मीद" "इन आँखों में एक उम्मीद-सी नज़र आती है तुम्हारे लौट आने की" #Mukesh NAMDEV read more >>
"अस्पताल" "अजीब-सी रात है,ये अस्पताल की कहीं खुशियों का महौल तो,कहीं अजीब-सी शांति है,तो कहीं गमगीन हैं आँखें,तो कहीं सिसकने की आवाज है,इ� read more >>
"किताब" "अगर ये तुम हो,तो बेहिसाब बेमिसाल हो, खुदा कसम खुद में एक खुली किताब हो" #Mukesh Namdev read more >>
कविता - जिधर देखता हूं,उधर तू ही तू है। धरा चाहे घूमूं गगन चाहे छू लूं पवन बनकर चारो दिशाओं में ढूढूं कण कण में जलवा,तेरा हू -बहू है जि� read more >>
मैंने सिखा है गिरकर भी संभलना संभल कर फिर से चलना डर से निकलना,निडर हो कर चलना मैंने सिखा है मैंने सिखा है, हार कर निराश न होना जीत के read more >>
भले ही लिबास बदल लेना और पोंछ लेना खून से सना हुआ मुंह अपना भले ही चेहरे की सियाही को मैकप से छुपा लेना मगर जिस दिन तुम्हारे पाप कुरेद� read more >>
अपनों ने बोली पुष्प कड़वी बातें वक्त के साथ भूल जाते है मगर वही बातें दूसरों ने बोली तो उम्र भर पेट में पालते हैं read more >>
अपना कितना भी क्यों ना बुरा हो अपना ही अच्छा लगता है और दूसरों का कितना भी क्यों ना अच्छा हो दूसरे का बुरा ही लगता है read more >>
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