#बहर:_2122
#काफिया:_जल/चल
#रदीफ:_रहा है।
#मिसरा:_दीप सा मन,
जल रहा है।
ताप सब घर,
जल रहा है।
कर्म ही तो,
फल रहा है।
प्रेम ही अब,
हल रहा है।
नाम read more >>
मानवता का अप्रतिम उदाहरण...
कल बाज़ार में फल खरीदने गया, तो देखा कि एक फल की रेहड़ी की छत से एक छोटा सा बोर्ड लटक रहा था, उस पर मोटे अक्षरों read more >>