Sudha Chaudhary 25 May 2023 कविताएँ समाजिक 36467 0 Hindi :: हिंदी
कभी-कभी शब्दों में, संसार नजर आता है। कभी-कभी शब्दों से, भार बढ़ा जाता है। यह कभी छोटे, कभी व्यापक बन जाते हैं। कहना चाहो जो कुछ, शब्द कह जाते हैं। शब्दों से आशा है शब्दों की परिभाषा है शब्द कहीं मिल जाए तो शब्द जाल बन जाते हैं। जैसी इसमें कटुता है, वैसे प्रेम भरा है। सारे भ्रम मिट जाते हैं, कहने वाले जब कह जाते हैं।