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मेरे ठीक सामने एक परिवार रहता है, इस परिवार में अनिल, उसकी पत्नी निशा, माता-पिता और एक मात्र पुत्र जो अभी 5-6 साल का ही है प्यार से सब उसे पि� read more >>
बहुत दूर चले जाएंगे तेरी जिंदगी से माना कि दर्द और तकलीफ होगी जरूर पर जाना भी है जरूर सोचा ना था बिन तेरे जीना होगा अश्कों के समंदर म read more >>
कितना अकेला हो गए थें हम जब तूने हमें अकेला छोड़ दिया जैसे ही हम संभल रहे थें फिर से तुमने आकर नजर के सामने अंधेरा कर दिया धन्यव� read more >>
तुम तो मेरी जिंदगी के कगार बन गए थें पर हमें क्या पता था कि तुम ही उसे गहराई में ढकेल दोगे धन्यवाद read more >>
दिल पर चोट खाते- खाते देखो हम क्या से क्या हो गए कल मोम थें आज पत्थर बन गए धन्यवाद read more >>
वक़्त के साथ कितना कुछ बदल जाता है जब साथ देने की बारी आती है तब हमारी परछाई भी हमें धोखा दे जाती है धन्यवाद read more >>
मौसम की तरह तुम बदल गए तुम्हें हमने अपनी जिंदगी का पतवार समझा तुम तो उसी पर चोट लगा दिए धन्यवाद read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" हमसब को नित ही मिले,माँ का प्यार दुलार। नेक इरादा यदि रहे, जीवन हो गुलजार। लिए धर्म को सा� read more >>
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" माँ का प्यार दुलार,सदा कायम रहता है। खुद पर हो विश्वास,उसे सबकुछ मिलता है। प्राण समर में या read more >>
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" सुन ले मेरा अर्ज अब, जीवन कर गुलजार। अपनों के साथ है,माँ का प्यार दुलार।। माँ का प्यार द read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अपनों के ही साथ है,माँ का प्यार दुलार। सुन ले मेरा अर्ज अब,जीवन कर गुलजार।। कभी कभी नीरस ल� read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रोक सके तो रोक ले,मस्त अटल हम फौज। प्यार भरा उपहार से,देने आया मौज। लेने आया दर्द को,मेरा � read more >>
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