नदी जब समंदर में मिलेगी तो खारी हो जाएगी,
चाँद जब जमीन पे उतरेगा तो दाग हो जाएगा,
तुम छुपकर घर में रहते हो,
अच्छा है उसी में रहा करो,
जब � read more >>
मुझे लगता है , मैं और मेरी सोच हमेशा एक जैसी नहीं रही हैं! शायद इसका कारण हमारी भावनाएं और हमारी सोच दोनों का अलग-अलग होना हैं , नहीं ऐसा भ� read more >>
ये रूठना , ये मनाना, अब रहने दो.....
तुम सही , मैं गलत.....
जो भी हैं अब रहने दो.....!!!
अब तो अच्छा है आंखों का बंजर हो जाना....
होठों पर सजी ख़ामोशी,अब read more >>
हमने भी देखे अपने हजार है
अपने के भेष में छिपे सारे गद्दार हैं....
देखकर मुश्किल हैं ये कह पाना......
कौन कितने वफ़दार है......
चेहरे पे लगे चेह� read more >>