कुछ दिन पहले कि बात है में अपनी छत की बालकनी पर बैठा था और पास से बच्चो को देख रहा था की वो कैसे हमारे बचपन की तरह खेल रहे तभी अचानक एक अलग read more >>
जीना इसी का नाम है.........😃😃
मेघा एक सरकारी दफ्तर में टाइपिस्ट थी । उसके हाथों की उंगलियां जब कंप्यूटर के "की बोर्ड" पर नर्तन करत read more >>
(1). मेरे किरदार पे उसकी ऊगली न उठी होती
गर उसकी भी कोई बहन या बेटी होती
(2). ख़ुद्दारी गवां कर ता'अल्लुक निभाना
मुनासिब नहीं ख़ुद को इतना गि� read more >>
लेखक भावों का भण्डार हैं,
उनको समझने वाला, कलाकार हैं,
ना धोखा, छल,ना माया का गुलाम हैं, हैं वो शब्दों की कैद में,बस भावों का संचार हैं,मन � read more >>