गांव में बीते बचपन का , मुझे स्वप्न दिखाई देता है |
अपने गांव का वो प्यारा,मुझे द्रश्य दिखाई देता है ||
कांव -कांव कौवों की ,हमको सुबह सु� read more >>
प्रेम का तन से कैसा नाता !
प्रेम की है ये कैसी भाषा !!
प्रेम बिछोह है, प्रेम मिलन है !
प्रेम अगन है, प्रेम लगन है !!
प्रेम सुरों की इक धड़क� read more >>
ज़मीन पर यह चलते हैं !
आसमानी बातें करते हैं !!
अल्फाज़ो में रखते दम हैं !
बेशक नंग हैं !!
देश की शान हैं !
चाहे कितने ही बदनाम हैं !!
खुद्दा read more >>
मन तो मन है, कैसे इसे टोकूं मैं ?
रो रहा है हर समां,
प्रिय कैसे आंसू रोकूं मैं ?
आना था,
मुन्ने के नामकरण जश्न में।
पहले ही आ गए,
लिपट तिरंग read more >>