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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
उसने मेरी मोहब्बत को खुदा समझ बैठा था। लेकिन महबूब खुदा की मोहब्बत को छोड़ दे ये मोहब्बत कैसा है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
मेरा किस्मत लिखने बाला बादशाह है। लेकिन मैं फकीर बना हुआ हूं।
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मकसद
कविता -मकसद ज्ञान मंजिल तक पहुंचाता है पर मंजिल का पता हो ध्यान मकसद तक ले जाता है अगर ध्यान मकसद पर डटा हो चूर चूर हो जाते हैं सारे �
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
जितना ज्ञान किताबों से नही मिला है उतना ज्ञान तो लोगों से ही सिख रखी है।क्योंकि किताबों में सिर्फ अच्छाई ही लिखी है लेकिन बुराई लोगो�
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब कुछ हासिल करो जिंदगी में सिबाये मोहब्बत के।क्योंकि अगर मोहब्बत हो गई तो तुम्हारी जिंदगी अपाहिज बन जायेगी।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
आज भले ही मेरी कसती डूबी हुई है लेकिन कल उगूंगा तो पानी पर तैरूंगा नही खुद पानी बन जाऊंगा।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
यहां अच्छा इंसान मौन हो रखा है।लेकिन बुरे लोग कुत्ते के तरह भौंक कर बुरे से अच्छे बनने का नाटक कर रहे है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अभी नया नया मोहब्बत है हो जाने दो जब इच्छा पूरी हो जायेगी तो मोहब्बत क्या वफा से भी विकलांग हो जायेंगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
सब जुल्म देख रहा हूं शाहब यहां लोगों की जनाजा निकल जाती है इंसाफ मिलने में। क्योंकि यहां सरकार ही जज है और गबाह भी।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
दूसरे के बुराईयों को उछालने वाले लोग अपने ही दामन में दाग लगाए बैठे है।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
अभी शुरुआत हुई है मोहब्बत की कमी क्या दिखाएंगे जब ख्वाहिश पूरी न होगी तो मोहब्बत क्या मोहब्बत नाम से भी घबराएंगे।
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Writer by Iqrar Ali, मोहब्बत शायरी दिल तोड़
हर बो आबाज़ दबानी है जो लोग मुझे बेकार समझते है।
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