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रामपुर गांव में एक धनवान सेठ रहता था ,वह बहुत धनवान था।वह लोगो को खूब दान - वान करता था पर उसमें एक खूबी थी कि वह उसी को अपना कुछ भी दान करत read more >>
वो मोहब्बत हमसे यूं कर बैठे हमने कुछ कहा ही नहीं वो सब तैयारी कर बैठे। धन्यवाद read more >>
आंखों में नमी आई जब मुझे तेरी याद आई अक्श बहने वाले ही थें पर तेरी बेवफाई याद आई। धन्यवाद read more >>
उनकी सुरमई आँखे, होठो से तो मद्य बरसे कातिल है हर अदा उनकी, जो भी कहूँ मै उनकी तारीफों मे, वो लफ्ज ही शायरी बन जाए ✍✍❤‍🔥❤‍🔥❤‍🔥❤‍🔥� read more >>
त्तक्.. त्तक्.. तग्ड़..ड़.. ड़.. ड़..ड़..तदुम्.. धां, त्तक् धीनक.. धीनक.. धीन.. धीन! तग्ड़.. दोन्गा.. दानी.. दोन्गा.. दानी.. तदुम्.. दूम, तना.. धीन्न.. धिन� read more >>
हेलो दोस्तों मैं मुस्तकीम रहीस अहमद मैं उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूं यह मेरी स्टोरी एक ऐसे परिवार को दर्शाती है जिस परिवार में मां नह read more >>
*अम्बे हम सब तेरे सहारे* अम्बे जय जय जय जगदम्बे हम सब हैं तेरे सहारे अम्बे ... महाकाली दुर्गा माता जय अम्बे नाम तुम्हारे इन तीनों नामो read more >>
दोष हवाओ को देने से पहले दिया- बाती भी संभाल लिया करो किसी को कुछ कहने से पहले थोड़ा सोच भी लिया करो शिक्षक का काम है पढाना मगर उसे सिखा� read more >>
मन के कोने कोने में तू ही बसा मेरी मैया तू आ जाए मेरे घर में मेरे भाग्य जगे मेरी मैया। धन्यवाद read more >>
म्हारी प्यारी खेजङी, ऊनाळै सियाळै तुं रेवै हरी-भरी, काळा हिरण थारै छिंया मे कुचाळा मारै, जद ऊनाळै मे सगळा वृक्ष सूख जावै। पण तुं किंया हरी-भरी रेवै, जेठ री लू मे तुं एकली खङी मुस्करावै, जीव थारी छींया मे बैठ अर जान बचावै ऊनाळै मे पाणी घणी घणी कोसा तांई नी मिळै, पण तुं खेजङी हरी-भरी रेवै। जेठ रै तीखै तावङीयै मे जींवा रै होठां माथै, फेफ्फियाँ आ जावै पण तुं युं खङी मुस्करावै, मारवाङ रा किसान थारी साँगरी ने गणै चावै सुं खावै, थारै लूंख ने खा'र अणूता ऊँठ अरङावै। धन्य धन्य थारी छाँव खेजङी, म्हारी रुपाळी प्यारी खेजङी। मिंमझर, साँगरी और खोखा देवै, थारो हाथ कदी न खाली रेवै। चिङी कमेङी री आश्चर्य दाता है तुं, केर,बोरङी अर किकर री साथी तुं। मारवाङ री शान खेजङी, म्हारी प्यारी रुपाळी खेजङी। - कवि सुनील कुमार नायक
म्हारी प्यारी खेजङी, ऊनाळै सियाळै तुं रेवै हरी-भरी, काळा हिरण थारै छिंया मे कुचाळा मारै, जद ऊनाळै मे सगळा वृक्ष सूख जावै। पण तुं किंया read more >>
लड़का :- अब के बरस झम - झम भीगी हुई है शाम भीगा है बदन उफ़ान है दिल का तूफ़ान लड़की :- नशीलें हैं शाम भीगे बदन में हम read more >>
शीर्षक (माँ दुर्गा) मेरे अल्फ़ाज़ (सचिन कुमार सोनकर) तू ही दुर्गा तू ही अम्बे तू ही वैष्णो रानी है। तुझमे ही ये संसार समाया तू ही पर्वत वा� read more >>
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