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खामोश थे ,शब्द उसके छाई थी! उदासी ,सी पास बैठ थे! हम भी, पर उसे ,पता नहीं ! ये क्या कोई दर्द था , या दिल्लगी तब से हम भी, ये ही सोच रहे है! read more >>
वो चलके आई थी, हाँ ,हाँ वो चलके आई थी , पास मेरे ...पर कुछ कह ना सकी हाँ शायद , वो कुछ कह ना क्यो , के मेरी माँ मेरे साथ मे थी ! read more >>
जैसा की हम सब जानते है। भारत अनेक धर्मों का देश होने के साथ - साथ यहाँ पर विभिन्न प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है। और अब त्यौहारो का सि� read more >>
वरिष्ठ नागरिक जीवन गति उदगार बताने, याद दिलाने, , ठहरी जिन्दगी को गति देने आया हूँ II आँखों की लुप्त हुई रौशनी को रौशनी, बंद read more >>
इक शिक्षिका जब मन के अंदर। ज्ञान की वीणा बजाती है। सच कहूं वो हमको रब के पास ले जाती है। अदब के वास्ते वो इल्म की सम्मा जलाती है जुबां � read more >>
बचपन आज यह सोच रहा कहाँ खो गया आज वो खुद अपने को खोज रहा बस्तो के नीचे दबा हुआ सोने के समय जगा हुआ भाग दौड़ के इस समय में वो समय के पीछे खो read more >>
यह है विषमता का जाम। पी -पी पागल हो रहे, दुनिया के लोग तमाम। जो गंवार हैं, वे शुद्ध गंवारू रूप में पीते हैं। पढ़े-लिखे थोड़ा, पानी मिला ल read more >>
एक समय था जो मैंने तुमसे कहा था बदल लेंगे वो सारी चीजें जो हमने सहा था एक समय था जो मैंने तुमसे कहा था शाम आज की भले ही बेजुबान हो बीते� read more >>
कविता (आज बचा कुछ भी नही) थोङे ख्वाब ,थोङी हकीकत, थोङे सवाल, थोङे जवाब, समझने-समझाने मे गुजर गई उम्र सारी, आज बचा कुछ भी नही ।। कुछ अपने read more >>
सत्ता... (कविता ) 1.कागज छुती न कलम उठाती,है इसे कुर्सी पर बैठे रहने की बिमारी, 2.हां...है अंधी ,गूंगी, बहरी और लंगङी,है इसे गाङी पर बैठे रहन� read more >>
(कविता) बेरोजगार की आवाज .... गांव गली शहरो मे चर्चे आम हो जाए, सत्ता धारी द्वार खोले तो हम तेरे हो जाए, तुम्ही हो भाषण, तुम्ही हो ताली, त� read more >>
कविता (यार मेरे ...) किस दौङ मे लग गए ना जाने दिनरात मेरे, अपनी चाहत को दुनिया की नजर खा गयी सारी, किस ख्वाब मे सिमट कर रह गए सुबह-शाम मेरे... read more >>
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