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दर्दे जहां में बहाने से रोये| हम तो उनका दिल दुखाने पे रोये| मुहब्बत की कलियों को खिलने से रोका| हम तो ऐसे कातिल जमाने पे रोये| शामिया read more >>
बर्षौ लग गए खुदको ‌समझाने में कि कहीं हम पागल तो नहीं थे आपको कुछ समझाने में। read more >>
सदा ही लहराता रहे ये तिरंगा हमारा सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा गूंज उठता हैं जहां में चारो ओर….. लोगो की जुबान से वन्दे � read more >>
इक तलप लगी है तेरी, उसे बुझाऊ कैसे इस बन्झर जमी पे, हरियाली लाऊ कैसे सौ अरमानो को दबाकर, इक ख्वाईस् की है उस दिलके ख्यालों को, हकीकत मे ब� read more >>
〰️〰️🌼〰️〰️🌼🌼〰️〰️〰️〰️🌼〰️〰️🌼 *खण्डग्रास सूर्यग्रहण-* प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर........ करण सिंह 〰️〰️🌼〰️〰️🌼🌼〰️〰️🌼〰️〰️〰️〰️🌼 ग् read more >>
भेदों की मूर्खता ___________________ जब बिजली पानी एक है, धरती भी सबकी एक है, न चांद सीतारें अलग यहाँ, सूरज भी कहाँ अनेक है, न अग्नि करती भेद यहाँ, � read more >>
लघुकथा- बख्सीस रामप्रसाद रेल्वे कुली था। वह कुलीगीरी से जितना कमाता था, रोजाना खाने-पीने और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में खर्च कर द read more >>
रूको-रूको बेटे रूक जाओ, चल जाने दो। अमीरों का है रेला, गरीबों का है ढेला।। जहां चाह वहां राह, जन्म-जन्म का साथ read more >>
जीतने से हारी हूं जिंदगी से नहीं कुछ जिद्द बाकी है, जिसम में read more >>
उम्र भर जो किया है तुम्हारे बिना । क्या वो तुमसे हुआ है हमारे बिना ।। तुम भले हो गए हो किसी और के । कोई तनहा जीया है तुम्हारे बिना ।। ह� read more >>
गहराई जमीन कि हो या समदर की तलाश ना पाऊ जिंदगी को हम जिंदगी के दर्द में हो गऐ गूम read more >>
14 साल की प्रतीक्षाओं का अंत हो रहा था। किसी को कुछ सूझ न रहा। भरत जी ने कहा सब लोग नंदिग्राम चलें। लोग दौड़ पड़े। गोस्वामी जी कहते हैं कि read more >>
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