14 साल की प्रतीक्षाओं का अंत हो रहा था। किसी को कुछ सूझ न रहा। भरत जी ने कहा सब लोग नंदिग्राम चलें। लोग दौड़ पड़े। गोस्वामी जी कहते हैं कि read more >>
कल जैसे थे आज भी वैसे हीं हैं
बस फर्क इतना सा हैं
कल छोटे थे, आज कुछ बढ़े हों गए हैं।
जिन हाथों से उंगलिया थम चला करतें थे।
आज उन हाथों में read more >>
मेरा नाचन का जी कर रहा स
तेरा रूप गजब का खिल रा स
मेरा अंग अंग अंगड़ाई ले
छोरे डीजे तेरा हिल रहा है स
औ डीजे वाले छोरे
मन ऐसा सॉन्ग सुना � read more >>
तेरे कल मे ,तेरे पल मे
जीवन की इस, हल-चल मे
सासें नहीं है, मेरी,
हो ......
सासें नहीं मे , मेरी .
रूह मेरी, करती
अहसास है तेरा ,
है, जन्मो का read more >>