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कविताएँ
गिरे हैं तो क्या है संभल जाएंगे.....
गिरे हैं तो क्या है संभल जाएंगे..... हौंसले पस्त नही हमारे ....... मालूम है जंग का हुनर हमें लौटकर फिर आएंगे ....... लोग जो गा रहे हैं कहानी हार की �
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प्रार्थना - प्रभु वर दो!
प्रभु वर दे! नित पथ पर आगे बढ़ने की आयाम नया कुछ गढ़नें की, हो दूर भले मंजिल जितना हठ मंजिल हासिल करने की, यश कीर्ति सुतेज प्
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रिश्तों के मायाजाल
वक्त की हर चोट को दिल में सजाने वालों की कुछ तो मनसा होती ,होगी आखिर,जिंदगी साथ बिताने वालों की फर्क समझ तुझे हर अल्फाज़ स�
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आज से, इन्तज़ार नहीं करना।।
आज से, इन्तज़ार नहीं करना।। उस , लम्हे का जो मिठास दें मुझे पास तेरे होने का अहसास दे।। चल , छोड़ दिया ।। तुझे इस हंसी दुनिया के भरो�
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अगर बेटी नहीं होती तो
अगर बेटी नहीं होती। तो मां नहीं हीं होती ।और मां नहीं होती। तो संतान नहीं होती।। अगर बेटी नहीं होती।तो बहन नहीं होती। और बहन नहीं होती�
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कवि की अभिलाषा
कवि की अभिलाषा लिख जाऊॅं कुछ लेख लेखनी से अपने मैं कर पाऊं सब पूर्ण लोकहित के सपने मैं कर जाऊॅं इतिहास अमर अपनें अपनों का शोषण हो न
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स्त्री
स्त्री नदियों के जल सी तुम "मीठी" बंधी किनारों के दायरे में "बहती" उथल-पुथल गहराई सहती "रहती" कल कल की गीतों को गाती "चलती" सफ़र सुहान�
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इस जग में सिया के राम
कोई मांगे हरि तो, कोई मांगे श्याम मैं मांगू इस जग में सिया के राम।। रोम रोम है खाली रोम में बसावे राम कोई मांगे हरि तो, कोई मांगे श्य�
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क्यों?
क्यों? रात रात भर तेरे सपने क्यों आते हैं? सपनों में भी तेरी बातें क्यों भाते है? यदि चाहूं कि आंख मूंद कर सो जाऊं मैं नींदों में भी �
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झूल गए वो फांसी
झूल गए वो फांसी सीने पर गोलियां खाईं थी शहीद हुए वीर सपूत तब जब बजनी उनकी शहनाई थी। आंखों में सपना था भारत मां की आजादी का हर दौलत बे
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झूल गए वो फांसी
झूल गए वो फांसी सीने पर गोलियां खाईं थी शहीद हुए वीर सपूत तब जब बजनी उनकी शहनाई थी। आंखों में सपना था भारत मां की आजादी का हर दौलत बे
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इश्क ए वफा
इश्क ए वफा बाखूबी हमने निभाया पर तुझे सनम राज क्यों ना आया मोहब्बत में क्या खूब सजा पाया जिसे दिल दिया उसी ने ठुकराया अक्सर तन्हाई म�
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