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अंधेरों में भी जो दिया जलाती है, गिरते हुए को राह दिखाती है। उम्मीद है वो शक्ति, वो आसमां, जो डूबे हुए को पार लगाती है। सपनों को जो मे� read more >>
बेरोजगारी का बोझ उठा थका हूं मैं, फूटी किस्मत की राहों में अटका हूं मैं। लोगों के ताने बनते हैं साये मेरे, सपनों की दुनिया से दूर भटका � read more >>
मेरे घर का एक कोना है। शांत नहीं है कुछ भी इसी बात का तो रोना है।। मैं हूं पागल परिंदा सन्नाटे का जिसको होना है। सनसनाती पवन का एक झोंक read more >>
क्यों? कोई क्यों समझता है मजबूत कोई क्यों समझता है कमजोर कोई क्यों करता है शिकार कोई क्यों होता है शिकार इंसान क्यों करता है इं read more >>
कविता -फिर क्यों? हम बंटेंगे तो कटेंगे फिर क्यों बंटे हैं? जातियों में धर्मों में ऊॅंच में नीच में शिकार हो रहे हैं - केवल गरीब लुट read more >>
मेरा नसीब चमके वो तारा नहीं मिला तन्हा कटी है उम्र सहारा नहीं मिला हम नाज जिसपे कर सके जिसकी मिसाल दे हमदर्द कोई ऐसा खुदा रa नहीं मिला read more >>
मानव के अधिकार का दिवस है ये कहलाता पर क्या मानव को यह उसका अधिकार है दिलाता जात पात की दीवार ने बांट दिए मानव धर्म ने मानव को बना दिय� read more >>
वो कहते है, मंजिल बहुत दूर है तू थक जाएगा , मैं कहता हूं सफ़र बहुत खूबसूरत है बड़ा मज़ा आएगा। वो कहते है , रास्ता बहुत लम्बा है तू अकेला क� read more >>
वो कहते है, मंजिल बहुत दूर है तू थक जाएगा , मैं कहता हूं सफ़र बहुत खूबसूरत है बड़ा मज़ा आएगा। वो कहते है , रास्ता बहुत लम्बा है तू अकेला क� read more >>
वो कहते है, मंजिल बहुत दूर है तू थक जाएगा , मैं कहता हूं सफ़र बहुत खूबसूरत है बड़ा मज़ा आएगा। वो कहते है , रास्ता बहुत लम्बा है तू अकेला क� read more >>
*कविता* *फूफा जी का रौब* हमारी पीढ़ी के फूफा बड़े मिजाजी होते थे बात -बात में गुस्सा होकर अपना आपा खोते थे।। ससुराल में मुंह फु� read more >>
जब लिया ठान है ही मन में , तो बस रास्तों को देख लो , सब फाँसलों को छोड़ दो , दिल में बैठी शंका है कैसी , ललाट पे ये भय है कैसा , मन में तुम धीरज र� read more >>
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