जीवन मे सुख और दुख का एक ही आकार है फर्क बस इतना है कि सुख के आकार को हम भरते नहीं और दुख के आकार को गिन गिन के भरते हैं
लेखिका प्रेरणा शर् read more >>
कौन अपना कौन पराया समझ नहीं आता हैं,हर‌ किसी का अपना अपना मतलब नजर आता हैं,
वो जमाना गया जो अपनों पर जान निछावर करते थे , यहां तो काम ना � read more >>