मेरे बेटे तुम मुझे माफ कर देना, मैं तुम्हारा कितना बड़ा, अपराधी पिता हूं,, मैंने तुझे कभी सूर्य की किरणों को" भी तुम पर आना नाजिम ना सम� read more >>
आगे बढ़ने की चाह !
और पीछे जा रहा है !!
आदम से आदमी !
आदमी से सभ्य !!
सभ्य से आदम !
हुआ जा रहा है !!
आदम का यह कारवां !
चांद पर जा रहा है !!
रफ़्� read more >>
ऩजर को लगी ऩजर, दिखाई देते पर दोष।
खुद को तो मानता, गुण-रत्न का कोष।
दूसरों की उघाड़कर, खुद की ढकने का होश।
दूर की जलती सूझे, घर में जले तो read more >>