(मुक्तक छंद)
मस्त कशिश में महक है,आकर्षण भी खूब।
पास चले आते सभी, लगती है महबूब।
गजब श्रृंगार में रहे, करती दिल पर राज_
कायल उसका है सभी, � read more >>
अब मैंने गुनाह करना छोड़ दिया ,
अब मैंने इश्क़ बेपनाह करना छोड़ दिया ,
वह निकलती है मेरे सामने से कई एक बार दिन में__
अब मैंने उसपे निगाह � read more >>
तेरे आने की आस लिए बैठा हूं ,
सूखे लवों पर प्यास लिए बैठा हूं ,
तू एक दिन मेरे पास जरूर आएगी __
ये सोंच कर तोहफ़ा कोई खास लिए बैठा हूं ।
_ शि� read more >>