फिरता उदास क्यों रे तू भाग्यवान,
तुझे मानुष देह रे तू भाग्यवान,
रे तू अनमोल है सृष्टि का सिरमौर है...
अंदर-ए-परम प्रकाश तू भाग्यवान!!!!
-म� read more >>
ये ज़िंदगी-
ये बहारें ये मौसम,
इनायत तेरा प्रभु तू ही कारण...
ये संसार-
में तेरा हर कार्य,
तू संभालता है प्रभु तू ही कारण...
तू ही पत्ता-� read more >>
तन अंदर लाल-
जाने-ए-भेद कोई-कोई,
सबके हृदय प्रभु-
जाने-ए-भेद कोई-कोई,
कण-कण में जो-
गति लखे सो लाल कोई-कोई,,
जाने पावन-
वह नाम-ए-लाल कोई-क� read more >>