Kishor Kumar Bhardwaj 05 Jun 2026 कविताएँ अन्य स्मृतियाँ 1808 0 Hindi :: हिंदी
कभी किसी ने कहा था — “समय-समय की बात है…” पर शायद समय भी अकेला कहाँ चलता है, वह तो कारणों की अनदेखी धारा में अपना स्वरूप पाता है। एक निर्णय… सिर्फ एक क्षण का चुनाव नहीं होता, वह अनंत संभावनाओं के द्वार खोलता है, और फिर उन्हीं में से किसी एक राह को चुनकर बाकी रास्तों को धीरे-धीरे स्मृतियों के अंधेरे में छोड़ देता है। कितनी ही कहानियाँ थीं, जो शायद लिखी जा सकती थीं, कितने ही कल थे जो किसी और दिशा में खिल सकते थे। पर समय पीछे मुड़कर नहीं चलता, वह चुनी हुई राह पर ही बहता है, और जो संभावनाएँ कभी पास थीं, वे धीरे-धीरे “काश” बनकर रह जाती हैं। शायद यही जीवन है— कुछ पाया हुआ, कुछ खोया हुआ, कुछ सामने खड़ा भविष्य, और कुछ ओझल होती अनंत संभावनाओं की स्मृतियाँ… ✍️के.भारद्वाज