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ठिकाना

MD SHAYEED ALAM 02 Dec 2025 शायरी समाजिक शायरी ठिकाना 9869 0 Hindi :: हिंदी

अगर खुदा ने दी है दौलत बेशुमार ,
तो इतराना नहीं है। 
एक दिन सब कुछ छोड़ कर जाना है, 
ये दुनिया तेरा मुस्तकिल ठिकाना नहीं है।।

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