MD SHAYEED ALAM 15 May 2026 शायरी समाजिक शायरी 2108 0 Hindi :: हिंदी
अपने स्कूल की गलियों में आज भी मैं फिरता हूं, शायद अपने खोए बचपन की मुझे तलाश है। जिम्मेदारियों ने छीना था बचपन मेरा, शायद इस बात का मुझे अब तक मलाल है।।
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