मोती लाल साहु 23 Apr 2023 शायरी अन्य मुद्दत के बाद मौसम आई है, दिल-ए-बाग में चार-चाँद खिलें हैं। 43188 0 Hindi :: हिंदी
दिलें दीवार में पड़ी यादों की, धुंधली सी छवि थी सहारा। आज पत्थराई नैन छलकी है, मुद्दत के बाद मौसम आई है।। सितारों से भरी ये रातें, चांँद जो पुरे शबाब में है, महफ़िलें जाम-ए-शबाब, गज़ब चार-चांँद खिलें हैं।। मुद्दत के बाद मौसम आई है! दिल-ए-बाग में चार-चांद खिलें हैं!! -मोती